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Bilaspur News: किरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर डेढ़ साल में 1.62 करोड़ के चालान, समस्याओं का समाधान नहीं

Sun, 10 Aug 2025 11:16 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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विस्थापितों, प्रभावितों की समस्याओं का नहीं हो रहा समाधान
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फोरलेन की गति सीमा 60, राज मार्गों पर 65 की स्पीड से दौड़ते हैं वाहन
कैमरों से सख्त निगरानी, समिति ने पुलिस रवैये पर जताया रोष

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर स्पीड लिमिट का उल्लंघन करने वालों से डेढ़ साल में करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये के चालान वसूले गए। सरकार और एनएचएआई ने यातायात व्यवस्था को अपने तरीके से नियंत्रित करने के लिए फोरलेन पर जगह-जगह कैमरे लगाकर चालान वसूली तो कर ली, लेकिन विस्थापितों और प्रभावितों की समस्याओं को सुलझाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
इस मामले की पुष्टि आरटीआई में ली गई सूचना में हुई है। फोरलेन प्रभावित एवं विस्थापित समिति ने आरटीआई में इसकी सूचना मांगी थी। इस फोरलेन पर छोटे वाहनों की अधिकतम गति सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जबकि राज्य मार्गों पर यह सीमा 65 किलोमीटर प्रति घंटा है। वाहन चालकों का कहना है कि चौड़ी और सुरक्षित फोरलेन पर कम गति सीमा और संकरी, जोखिमभरी सड़कों पर अधिक गति सीमा तय करना समझ से परे है।
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यातायात नियंत्रण के लिए मई 2024 में राज्य सरकार ने मेहला, मंडी भराड़ी, औहर और टिहरा में चार कैमरे लगाए, जबकि अन्य कैमरे एनएचएआई ने स्थापित किए। वर्ष 2024 में 55,804 ऑनलाइन चालान बने, जिनमें से 234 का भुगतान थानों में हुआ। ऑफलाइन चालान 53 रहे, जिनका भुगतान अदालत में हुआ। 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2024 तक 1 करोड़ 12 लाख 84 हजार रुपये की वसूली हुई। 1 जनवरी से 30 अप्रैल 2025 तक गरा से बरोह के बीच 49 लाख 40 हजार रुपये के चालान हुए।
समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि अलाइनमेंट, डेविएशन, अवैध मुआवजा आवंटन, भूमि सीमांकन, बुर्जियां, फुटपाथ, फुटब्रिज, अंडरपास, स्ट्रीट लाइट, स्टील बैरिकेड, रिटेनिंग वॉल, ब्रेस्ट वॉल, भूमि अधिग्रहण में अनियमितताएं, अवैध मलबा डंपिंग, मछुआरों की समस्याएं और चार गुना मुआवजे जैसे मामलों पर सरकार और एनएचएआई कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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पुलिस कार्यालय में सूचनाएं मौजूद होने के बावजूद समय पर उपलब्ध नहीं करवाई जा रही हैं। आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 6(3) के तहत संबंधित विभागों को सूचनाएं स्थानांतरित करने की व्यवस्था भी लागू नहीं की गई। समिति ने जनसूचना अधिकारी से अन्य कैमरों के स्थान और उन पर हुए खर्च की जानकारी मांगी है।
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