बिलासपुर। बिलासपुर जिले में दर्ज होने वाले तमाम कोरोना पॉजीटिव मरीजों के इलाज के दौरान उन्हें दी जाने वाली डाइट पर किसी का ध्यान नहीं है। संतुलित पोषक तत्वों से भरपूर तीन वक्त के खाने के साथ इन्हें दिए जाने वाले हेल्थ सप्लीमेंट भी गायब हैं। सेंटर में दाखिल लोगों व इनका इलाज करने में लगे हुए डॉक्टरों के लिए जरूरी डाइट चार्ट के अनुसार भोजन की भी सप्लाई नहीं हो पा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग बजट का रोना रोककर अपना पल्ला झाड़ लिया है।
जानकारी के अनुसार कोविड केंद्र में हर रोज मरीजों व डॉक्टरों को डाइट के नाम पर कड़ी चावल परोसा जा रहा है। जिससे कोरोना से बाहर निकालने और कोरोना से बचने के लिए जो भी खाने पीने के लिए जरूरी मानक तय किए गए हैं वे पूरे नहीं हो पा रहे हैं। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग अपने खाते में पैसे की कमी का हवाला दे रहा है। बीएमओ मार्कंडेय एवं सेंटर के प्रभारी नोडल ऑफिसर डॉ एसएल वर्मा ने कहा है कि डॉक्टरों ने इस कमी का उल्लेख करते हुए उन्हें पत्र लिखा था, लेकिन उनके यहां अब बजट की कमी है। सरकार की ओर से साफ निर्देश हैं कि इस व्यवस्था को सीएमओ व बीएमओ दोनों स्तर पर साझी जिम्मेदारी से पूरा किया जाएगा। उन्होंने इस बारे में सीएमओ बिलासपुर को पत्र लिखा तो वहां से जबाव आया है कि बीएमओ मार्कंड ही इस मामले को स्वतंत्र तरीके से संभाले या जिला प्रशासन से बात करें।
डॉ. वर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में इस तरह के मामलों में बजट का प्रावधान सीएमओ के अधीन ही होता है। उनकी ओर से अगर पैसा जारी हो तो ही वे सेंटर के डॉक्टरों की ओर से तय किए गए डाइट चार्ट को लागू करवा सकते हैं। फिलहाल, उनके पास बजट नहीं है।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. प्रकाश दड़ोच ने कहा कि यह काम जिला प्रशासन या सेंटर के नोडल ऑफिसर का होता है। उन्होंने बताया कि बीएमओ मार्कंड बताएं कि सीएमओ की साझी जिम्मेदारी को लेकर राज्य सरकार की ओर से कब नोटिफिकेशन जारी किया गया है। सीएमओ ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
आज ही डाइट सप्लाई करने वाले कैंटीन संचालक से बात की है। उसकी पेमेंट करने के निर्देश दे दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर कोई कमी नहीं रखी जाएगी। वे रेवन्यू हेड से पैसे का भुगतान करेंगे। इसके बावजूद अगर कहीं पर कोई कोताही होगी तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।-राजेश्वर गोयल, उपायुक्त बिलासपुर