मलबे से भरा झंडूता का ऐतिहासिक नौण। संवाद
लोगों में रोष, गंदगी से जल स्रोत की उपयोगिता घटी
बरसात के बाद अब तक नहीं हुई सफाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं(बिलासपुर)। झंडूता क्षेत्र का ऐतिहासिक नौण इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है। बीते बरसात के मौसम में हुई भारी बारिश के चलते नौण में बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा जमा हो गया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इसकी सफाई नहीं करवाई गई है। इससे जहां नौण की सुंदरता प्रभावित हुई है, वहीं इसका जलस्रोत के रूप में उपयोग भी लगभग खत्म होता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नौण वर्षों पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है, जो पहले आसपास के गांवों के लिए मुख्य जल स्रोत हुआ करता था। लोग यहां से पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी भरते थे, लेकिन अब मलबा भरने के कारण पानी गंदा हो गया है और इस्तेमाल करने योग्य नहीं रहा। बताया कि पिछले मानसून में तेज बारिश के कारण नौण की एक दीवार भी क्षतिग्रस्त होकर गिर गई थी। हालांकि बाद में दीवार की मरम्मत कर दी गई, लेकिन नौण के भीतर भरे मलबे को हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीण रमेश कुमार ने बताया कि बरसात के समय काफी नुकसान हुआ था। दीवार तो ठीक कर दी गई, लेकिन अंदर भरा मलबा आज तक नहीं निकाला गया। इससे पानी की गहराई कम हो गई है और गंदगी बढ़ रही है। वहीं, सुरेश चंदेल, लौका राम, राकेश चंदेल और विक्रम का कहना है कि प्रशासन को इस बारे में कई बार अवगत करवाया गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिला मंडल वाडा की सदस्यों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि पानी के इस पारंपरिक स्रोत की अनदेखी करना गंभीर लापरवाही है। कमल शर्मा और शशि कांत ने बताया कि यदि समय रहते सफाई नहीं करवाई गई तो आगामी बरसात में और अधिक मलबा भर जाएगा, जिससे नौण के पूरी तरह खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नौण की मशीनों के माध्यम से सफाई करवाई जाए और इसके संरक्षण के लिए स्थायी योजना बनाई जाए। साथ ही उन्होंने नौण के आसपास सुरक्षा दीवार को मजबूत करने और नियमित देखरेख की व्यवस्था करने की भी अपील की है। लोगों का कहना है कि यह नौण केवल पानी का स्रोत ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी है। ऐसे में इसका संरक्षण बेहद जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत से जुड़ी रह सकें। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।