-बुजुर्ग राजपाल सरीन बोले, खड्डों पर मालिकाना हक जताना कहां तक सही
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। त्रिवेणी घाट में चल रहे विवाद को लेकर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अली खड्ड से पानी की नई योजना बनती है तो बिलासपुर के जिन क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति होती है, वह सूखे की कगार पर आ जाएंगे। वहीं, 86 वर्षीय बुजुर्ग राजपाल सरीन का कहना है कि यहां से पानी देना गलत है। पूर्व समय से ही यहां के स्थानीय लोग इस खड्ड के पानी का प्रयोग करते हैं। जो लोग आज यहां मालिकाना हक की बात कर रहे हैं, वह गलत है। राजपाल सरीन ने बताया कि त्रिवेणी घाट में तीन नदियां आकर मिलती हैं। एक पंजैली खड्ड जो बिलासपुर में पड़ती है, दूसरी खड्ड मांगू ग्याना से आती है और तीसरी खड्ड चमाकड़ी है। इनसे मिलकर त्रिवेणी घाट बनता है। यह स्थान सिकरोहा पंचायत में पड़ता है। उनके स्वर्गीय पिता लाला नथूराम ने 1926-27 में दो किलोमीटर लंबी कुल बनाकर 70 फीट की ऊंचाई पर टैंक बनाया। उसके बाद वहां धान की मशीन, तेल का कोलू और बिजली का उत्पादन शुरू किया। उनके पास एक बहुत अच्छे मिस्त्री रहा करते थे, उनकी देख-रेख में यह सब कार्य किया गया। इस कार्य की शिकायत बिलासपुर राजा के पास पहुंची और यह कार्य बंद कराए गए, लेकिन धान की मशीनें 1990 तक चलती रहीं। अब दाड़लाघाट वाले दो खड्डों पर अपना मालिकाना हक समझते हैं। यह बिल्कुल गलत है। क्या कभी खड्ड का इंतकाल भी हुआ है, यह तो प्रकृति की देन है। वहीं, नवगांव के लोग तो 1952-53 में इस खड्ड से पानी ले चुके हैं। 1990 के आसपास दाड़ला में सीमेंट फैक्टरी लगनी शुरू हुई। उससे पहले भी वह कहीं से तो पानी लाते थे, आज 34 साल बाद उन्हें इसकी याद आ रही है।