कहा- ई-केवाईसी न होने और लंबित दावों से श्रमिक परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। इंटक ने हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बोर्ड की अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण श्रमिकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि लंबित दावों, पेंशन और ई-केवाईसी से जुड़ी समस्याओं का खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। संयुक्त बयान में अध्यक्ष रूप सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष धर्म सिंह सहगल, चैन सिंह सुमन, महासचिव जगतार सिंह बैस और सचिव प्रेम लाल भाटिया ने कहा कि पिछले एक माह से श्रम कल्याण बोर्ड के पोर्टल पर ई-केवाईसी नहीं हो पा रही है। जबकि बोर्ड का अपना पोर्टल होने के बावजूद निजी कंपनी के माध्यम से ई-केवाईसी करवाई जा रही है। इसके चलते श्रमिकों को मजबूरन बिलासपुर स्थित बोर्ड कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उनकी मजदूरी भी प्रभावित हो रही है। संगठन ने कहा कि वर्ष 2021 से अब तक मृत श्रमिकों के आश्रितों के 137 मुआवजा दावे बोर्ड को स्वीकृति के लिए भेजे गए, लेकिन अब तक किसी भी आश्रित को मुआवजा राशि नहीं मिली। इनमें वर्ष 2021 के 38, 2022 के 37, 2024 के 13, 2025 के 39 और जून 2026 तक के 10 दावे शामिल हैं। इंटक ने यह भी कहा कि कई श्रमिकों की पेंशन पिछले एक वर्ष से बंद पड़ी है। जोल पलाखीं गांव के कैंसर पीड़ित श्रमिक बिशन दास की पेंशन भी पिछले एक साल से लंबित बताई गई है। उनका कहना है कि बोर्ड की कार्यप्रणाली के कारण पंचायत चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।
मुख्यमंत्री को वास्तविक स्थिति से अवगत कराएगी इंटक
इंटक ने कहा कि वह सभी दस्तावेजों सहित मुख्यमंत्री को वास्तविक स्थिति से अवगत कराएगी। संगठन ने सरकार से श्रम कल्याण बोर्ड के ई-केवाईसी पोर्टल को शीघ्र शुरू करने, लंबित दावों का निपटारा करने और श्रमिकों के बकाया भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। चेतावनी दी गई कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो मजदूर इंटक के बैनर तले सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।