श्रम कल्याण बोर्ड की अधिसूचना को बताया मजदूर विरोधी
कहा, 6 माह में क्लेम करना असंभव, बैठक में जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का लगाया आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल बिल्डिंग-कंस्ट्रक्शन एंड मनरेगा मजदूर यूनियन (इंटक) की राज्य कार्यकारिणी की बैठक बुधवार को इंटक कार्यालय घुमारवीं में हुई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के अध्यक्ष जगत राम शर्मा ने की। इस दौरान श्रम कल्याण बोर्ड की हालिया अधिसूचना को मजदूरों के हितों के खिलाफ बताते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि अगर सरकार ने अधिसूचना वापस नहीं ली, तो यूनियन हाईकोर्ट का रुख करेगी।
यूनियन ने 24 मई 2025 को श्रम एवं रोजगार विभाग की ओर से जारी उस अधिसूचना का विरोध किया, जिसमें श्रम कल्याण बोर्ड में पंजीकृत मजदूरों को विभिन्न लाभों के क्लेम छह माह के भीतर प्रस्तुत करने की समय-सीमा तय की गई है। यूनियन ने कहा कि पहले यह समय-सीमा निर्धारित नहीं थी और अब अचानक से इसे लागू करना हजारों कामगारों के हितों पर कुठाराघात है। अध्यक्ष जगत राम शर्मा ने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, दुर्गम कार्यस्थल और जानकारी की कमी के कारण मजदूर अक्सर कई सालों तक लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं। कई प्रवासी मजदूर एक साल तक अपने घर नहीं जा पाते और आवश्यक दस्तावेज जुटाने में लंबा समय लग जाता है। मृत्यु मुआवजा या छात्रवृत्ति जैसे मामलों में तो छह महीने की सीमा व्यावहारिक ही नहीं है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने यह अधिसूचना वापस नहीं ली तो इंटक मजदूरों के हकों की लड़ाई अदालत में लड़ेगी। यूनियन महासचिव रूप सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष धर्म सिंह सहगल और इंटक सचिव प्रेम लाल भाटिया ने बताया कि 16 जून को यह मांगपत्र हमीरपुर में चेयरमैन नरदेव कंवर को सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष जगतार सिंह बैंस, विधि सचिव डीडी कौंडल, कांगड़ा से संजय सैनी, बिलासपुर से रूप सिंह ठाकुर, हमीरपुर से कर्म चंद जस्सल, ऊना से विजय राणा, सुजानपुर से रमेश कुमार, नादौन से विनोद कुमार, पालमपुर से उत्तम महेता सहित कई जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।