डिजिटल न चलाएं
परियोजनाओं के भूमि अधिग्रहण आंकड़ों में बड़े अंतर पर सरकार ने जताई गंभीर चिंता
फोरलेन, टू-लेन में अधिग्रहित भूमि, मुआवजे और कब्जे का मामला
संबंधित विभागों में नहीं है परियोजनाओं की रिपोर्ट पर आपसी तालमेल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश सरकार ने राज्य में फोरलेन और टू-लेन सड़क परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा संबंधी आंकड़ों में भारी अंतर पाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित सभी इकाइयों को वास्तविक स्थिति पर स्पष्ट और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के भू-अर्जन अधिकारी, मुख्यालय बिलासपुर ने विभिन्न तिथियों पर केंद्र और राज्य के अधिकारियों के सामने आंकड़े प्रस्तुत किए थे, लेकिन इनके बीच कहीं भी मेल नहीं पाया गया। कई गांवों का इंतकाल अभी तक केंद्र के पक्ष में प्रमाणित नहीं हुआ है, जबकि मौके पर सड़क निर्माण और कब्जा एनएचएआई का है या कहीं कब्जा ही नहीं है। जानकारी के अनुसार, भूमि मालिकों को मकान, पेड़ और भूमि के मुआवजे के बावजूद एनएचएआई ने मूल अलाइनमेंट बदलकर निजी हितों को लाभ पहुंचाने की घटनाएं की हैं। सड़क की चौड़ाई कम और बढ़ाने में भी गड़बड़ी पाई गई है, जिससे सड़क की सुरक्षा खतरे में है। सरकार ने कहा है कि परियोजनाओं में मुख्य रूप से कीरतपुर-मनाली, शिमला-मटौर, शिमला-परवाणु और नालागढ़ में केंद्र के लेआउट प्लान के अनुसार भूमि की पुष्टि की जाए। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कितने मेन रोड और लिंक रोड इस सड़क निर्माण से पहले शामिल थे। कितनी वन भूमि परिवर्तित हुई, कितनी सरकारी और निजी भूमि का अधिग्रहण उचित था, और कितनी भूमि आरओडब्ल्यू के भीतर व बाहर कब्जा की गई।
सरकार ने कहा है कि सड़क निर्माण के दौरान परिवर्तित वन भूमि की वास्तविक स्थिति, पिलर टू पिलर दूरी, बैक बियरिंग और फ्रंट बियरिंग का विवरण भी रिपोर्ट में शामिल किया जाए। इसके बाद ही मुआवजे का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा और सरकार तथा समिति आगे की रणनीति तय करेगी। विशेषज्ञों ने कहा कि लगातार कमेटियों का गठन होने के बावजूद मौके पर सही निरीक्षण न होना चिंता का विषय है और इससे परियोजना की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। बताते चलें कि पूरे मामले को फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय हिमाचल के समक्ष उठाया है। समिति की ही शिकायत और दिए गए तथ्यों के आधार पर सरकार ने यह कार्रवाई की है। समिति के महासचिव मदन लाल ने कहा कि आरटीआई में उन्हें जानकारी सरकार की ओर से दी गई है कि वो इस मामले को लेकर गंभीर है। वहीं इसमें जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।