- मधुमक्खी पालन से आर्थिक सुदृढ़ बन सकते हैं किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। मानव विकास संस्थान कलोल की ओर से जेजवीं-ढोलग जलागम विकास परियोजना के तहत रविवार को प्रशिक्षण केंद्र कलोल में मधुमक्खी पालन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को मधुमक्खी पालन की बेहतरीन तकनीकों और उससे आर्थिक लाभ के बारे में जानकारी दी गई।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अनुकूल व्यवसाय के रूप में सही है। इतना ही नहीं बल्कि किसानों का कृषि में सहायक होने के साथ ही आमदनी का एक जरिया भी है। मधुमक्खी पालन साल भर किया जा सकता है, लेकिन मधुमक्खी पालन के लिए जनवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त रहता है। वहीं नवंबर से फरवरी का समय तो इस व्यवसाय के लिए फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां रोजगार का साधन प्राप्त होता है। वहीं परागण के माध्यम से फसलों से होने वाली आय और गुणवत्ता में भी वृद्धि होने के साथ ही मधुमक्खी पालन से शहद और मोम जैसे उत्पाद भी प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियों द्वारा तैयार किया हुआ शहद का इस्तेमाल औषधि के तौर पर प्रयोग किया जाता है। यह जितना स्वादिष्ट होता है, उतना ही सेहतमंद भी होता है। शहद में हाई एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इस दौरान उन्होंने शहद असली है या नकली की पहचान के तरीके भी बताए। उन्होंने बताया कि शीशे का गिलास गर्म पानी भर लें। इसके बाद इसमें एक चम्मच शहद डालें, अगर यह शहद पानी की तली में बैठ जाती है तो शहद असली है, लेकिन अगर यह पानी में घुल जाता है तो इसका मतलब शहद मिलावट यानी नकली है। इस प्रशिक्षण में 70 लोगों ने भाग लिया। इस मौके पर मानव विकास संस्थान कलोल के निदेशक रसम चंदेल, कृषि विभाग के सेवानिवृत्त उप निदेशक रवि शर्मा, जेजवीं ढोलक जलागम परियोजना ग्राम समिति के अध्यक्ष राम मौजूद रहे।