- मुरादाबादी थाली, बूडन की पूजा थाली, सरगी थाली की मांग बढ़ी
-1200 रुपये में बिकने वाली सोलह श्रृंगार सामग्री के दाम हुए 1400 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। करवाचौथ को लेकर बाजार सज गए हैं। बाजारों में खरीदारी के लिए महिलाओं की संख्या बढ़ने लगी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष महंगाई में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके बावजूद खरीदारी को लेकर महिलाएं खरीदारी करने में काफी रुचि दिखा रही हैं।
इस साल करवाचौथ पर श्रृंगार सामग्री के अलावा कांच की चूड़ियों के दाम बढ़े हैं। वहीं ब्रांडेड कॉस्मेटिक के दामों में भी उछाल हुआ है। पति की लंबी आयु के लिए सुहागिनें इस व्रत को करती हैं। इसके लिए बाजार कांच की चूड़ियों, मुरादाबादी थाली, बूडन की पूजा थाली, सरगी थाली के अलावा मिट्टी से बने करवे और नारियल की डिमांड बढ़ चुकी है। करवाचौथ के लिए बिलासपुर, घुमारवीं, दधोल, बरठीं, भराड़ी, कुठेड़ा, शाहतलाई आदि कस्बों में भीड़ उमड़ रही है। कांच की चूड़ियों के अलावा फैंसी चूड़ियां भी काफी बिक रही हैं। पिछले वर्ष 80 रुपये प्रति दर्जन बिकने वाली कांच की चूड़ियां इस वर्ष सौ रुपये प्रति दर्जन बिक रही हैं। 1200 रुपये में बिकने वाली सोलह श्रृंगार सामग्री के दाम भी 1400 रुपये तक हो गए हैं। इसके अलावा बिंदिया पांच रुपये से सात रुपये, परांदा 60 रुपये से 300 रुपये तक बिक्री हो रहा है। फैंसी थाली का दाम पचास रुपये से दो सौ रुपये तक है, जबकि मिट्टी से बने करवे से 30 रुपये तक बिक रहा है। मिट्टी से बने करवे भी इस वर्ष अलग डिजाइन में उपलब्ध हैं। कारीगरों द्वारा बनाए जा रहे मिट्टी के करवों को नया रूप दिया गया है। बाजार की चकाचौंध को देखते हुए करवे को कपड़े से डिजाइन किया गया है। जो महिलाओं को काफी पसंद आ रहे हैं।
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पटियाला परांदे की सबसे ज्यादा डिमांड
बीते समय महिलाओं में परांदे लगाने का प्रचलन कम हुआ था, लेकिन इस वर्ष बाजारों में परांदों की डिमांड बढ़ चुकी है। लटकन और मोती लगे परांदे काफी बिक रहे हैं। सबसे ज्यादा डिमांड पटियाला परांदे की देखी गई है।
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प्लाजो,पटियाल सूट, अफगानी सूट सिलवा रहीं महिलाएं
करवाचौथ के त्योहार पर टेलरिंग की दुकानों पर भी काफी भीड़ है। शहरों में देखा जाए तो सिलाई के दाम पिछले वर्ष की अपेक्षा पचास से सौ रुपये बढ़े हैं, जबकि गांव की दुकानों पर दाम नहीं बढ़े हैं। इस वर्ष प्लाजो, पटियाला सूट, अफगानी सूट ज्यादा सिलावाए जा रहे हैं। पिछले वर्ष प्लाजो सूट की सिलाई 350 रुपये थी जो इस बार 400 रुपये हो गई है। वहीं पटियाला व अफगानी सूट की सिलाई पिछले वर्ष 300 रुपये थी जो इस बार साढ़े तीन सौ से चार सौ रुपये हो गई है। ऑनलाइन सूट खरीदने की तरफ भी रुझान बढ़ा है। गांव में सिलाई का काम करने वाले लोगों की माने तो ऑनलाइन व्यापार से फर्क पड़ा है।