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Bilaspur News: घुमारवीं में नियम ताक पर, सरकारी संपत्तियों पर अवैध विज्ञापनों की भरमार

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अभियान: मुसीबत बने अवैध होर्डिंग
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सरकारी भवनों, सार्वजनिक संपत्तियों, बिजली के खंभों पर लटके हैं होर्डिंग
निजी संस्थान, कोचिंग सेंटर, निजी अस्पताल, रियल एस्टेट का हो रहा विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं शहर में इन दिनों अवैध होर्डिंग और फ्लेक्स बोर्डों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। सरकारी भवनों, सार्वजनिक संपत्तियों, बिजली के खंभों, टेलीफोन पोल, बस स्टॉप, दीवारों और यहां तक कि निजी परिसरों की सीमाओं तक पर बिना अनुमति लगाए गए विज्ञापन नियम-कायदों को खुली चुनौती दे रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर का कोई प्रमुख चौक या बाजार ऐसा नहीं बचा है जहां बेतरतीब ढंग से टंगे बैनर और बोर्ड नजर न आते हों। एक ओर जहां कानून स्पष्ट रूप से सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना अनुमति विज्ञापन लगाने पर रोक लगाता है, वहीं दूसरी ओर घुमारवीं में यह प्रतिबंध केवल कागजों तक सिमटकर रह गया है।
शहर के मुख्य बाजार, गांधी चौक, बस स्टैंड क्षेत्र और आसपास के रिहायशी इलाकों में सरकारी इमारतों की दीवारें प्रचार सामग्री से पटी पड़ी हैं। बिजली के खंभों और टेलीफोन पोलों पर रस्सियों और तार के सहारे बड़े-बड़े फ्लेक्स लटका दिए गए हैं। विडंबना यह है कि सरकारी योजनाओं के प्रचार से जुड़े बोर्ड भी कई स्थानों पर सार्वजनिक ढांचों पर टंगे दिखाई देते हैं। जब सरकारी स्तर पर ही नियमों का सख्ती से पालन नहीं होता, तो निजी संस्थान, कोचिंग सेंटर, निजी अस्पताल, रियल एस्टेट कारोबारी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बिना अनुमति के अपनी प्रचार सामग्री कहीं भी लगाने से नहीं चूकते। अवैध होर्डिंग्स ने घुमारवीं की सौंदर्य व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐतिहासिक और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों की पहचान इन विज्ञापनों के पीछे छिपती जा रही है। दीवारों पर चस्पां किए गए पोस्टर और फ्लेक्स शहर की साफ-सफाई और व्यवस्थित छवि पर भी दाग लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर की सुंदरता और व्यवस्थित विकास की बात करने वाला प्रशासन यदि सार्वजनिक संपत्तियों को ही सुरक्षित नहीं रख पा रहा, तो स्मार्ट और स्वच्छ शहर की परिकल्पना अधूरी रह जाएगी।
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सुरक्षा के लिए भी बन रहे खतरा
अवैध होर्डिंग्स केवल सौंदर्य का मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी बड़ा खतरा हैं। कई स्थानों पर भारी-भरकम लोहे के फ्रेम वाले बोर्ड कमजोर सहारों पर टिके हुए हैं। तेज आंधी, बारिश के दौरान ये बोर्ड ढीले होकर गिरने की स्थिति में आ जाते हैं। यदि किसी व्यस्त सड़क या बाजार क्षेत्र में अचानक कोई बड़ा बोर्ड गिर जाए तो जान-माल की हानि से इन्कार नहीं किया जा सकता। पहले भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में होर्डिंग गिरने से हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती जा रही।
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80 लाख का फुट ब्रिज बना विज्ञापनों का अड्डा
करीब 80 लाख रुपये की लागत से निर्मित घुमारवीं का एकमात्र ओवरहेड फुट ब्रिज भी अवैध विज्ञापनों की गिरफ्त में है। पुल के चारों ओर इतने अधिक बोर्ड लगा दिए गए हैं कि उसकी मूल संरचना तक साफ दिखाई नहीं देती। इन बोर्डों की आड़ में रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा है। इससे राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। जिस पुल का निर्माण लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए किया गया था, वह अब प्रचार सामग्री टांगने का माध्यम बन गया है।
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नगर परिषद को हो रहा राजस्व नुकसान
नगर परिषद के नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार की विज्ञापन सामग्री लगाने से पहले अनुमति लेना और निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य है लेकिन अधिकांश मामलों में बिना अनुमति ही बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इससे न केवल नियमों की खुलेआम अवहेलना हो रही है, बल्कि नगर परिषद को मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। यदि सभी विज्ञापन नियमानुसार लगाए जाएं, तो परिषद को अच्छी आय हो सकती है, जिसका उपयोग शहर के विकास कार्यों में किया जा सकता है।
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कार्रवाई के दावे, पर असर सीमित
नगर परिषद समय-समय पर अवैध प्रचार सामग्री हटाने की कार्रवाई जरूर करती है। अभियान चलाकर कई बोर्ड और फ्लेक्स हटाए भी जाते हैं, लेकिन यह प्रयास स्थायी समाधान नहीं दे पा रहा। कुछ दिनों बाद फिर नए बोर्ड उसी स्थान पर नजर आने लगते हैं। जब तक दोषियों पर सख्त जुर्माना और कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी।
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कोट
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर परिषद नियमित रूप से अवैध विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करती है। किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री लगाने के लिए परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य है तथा इसके लिए निर्धारित शुल्क तय है। यदि बिना अनुमति के कोई बोर्ड लगाया जाता है तो उसे हटाया जाता है। यदि अभी भी शहर में कहीं अवैध विज्ञापन लगे पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्वयं सामग्री हटाने को कहा जाएगा, अन्यथा उनका सामान जब्त कर लिया जाएगा।
-खेमचंद वर्मा, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद घुमारवीं
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