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रंगड़ों के काटने पर व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाए : डॉ. महेश

Mon, 18 Nov 2024 11:06 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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रंगड़ों का हमला होने पर मुंह को ढक कर भागे दूर
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- गले और चेहरे पर रंगड़ों का काटना हो सकता है जानलेवा

संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। रंगड़ों के काटने के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। शनिवार को सिरमौर के शिलाई में रंगड़ों के काटने से एक महिला को मौत हो गई। जबकि रविवार को झंडूता के नघ्यार गांव में एक बुजुर्ग पर रंगड़ों के झुंड ने हमला कर दिया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
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रंगड़ों के हमले से बचने और काटने के बाद कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। रंगड़ों के काटने के अधिकतर मामले उनके छत्तों से छेड़छाड़ करने से होते हैं। लेकिन कई बार वह अन्य कारणों से भी उग्र हो जाते हैं। खंड चिकित्सा अधिकारी घुमारवीं डॉ. महेश जसवाल ने बताया कि रंगड़ काफी खतरनाक होते हैं। जब वह गले और चेहरे पर काटते हैं तो जानलेवा हो सकता है। रंगड़ के काटने पर यदि व्यक्ति को तुरंत अस्पताल न पहुंचाया जाए तो उसकी मौत भी हो सकती है। इसलिए रंगड़ों के काटने पर व्यक्ति को सबसे पहले अस्पताल पहुंचाए। रंगड़ हमेशा झुंड में चलते हैं। मुंह, सिर, पैर, हाथ ढके नहीं होते और खुले होने के चलते रंगड़ इन हिस्सों पर हमला कर देते हैं। रंगड के डंक में एक प्रकार का जहर होता है और इसके काटने से शरीर में भी जहर बनने लगता है, जो किडनी पर असर डालता है, जिससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि रंगड़ों के छत्ते में धुंआ करना, पानी और कीटनाशक का छिड़काव आदि नहीं करना चाहिए। रंगड़ों या उनकी प्रजाति की मक्खियां के झुंड के आस-पास शांत रहें। हमला होने की अवस्था में मुंह को भी ढककर हमले के स्थान से तेजी से दूर जाएं। खेत, जंगल, झाड़ियों में काम करते समय पूरे शरीर पर कपड़े पहनने चाहिए। किसी को एक से अधिक रंगड़ों ने काटा है तो उसको अविलंब चिकित्सालय पहुंचाकर इलाज की जरूरत होती है। जब भी रंगड़ काटे तो सबसे पहले अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करें और खुद को शांत रखें।
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