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Bilaspur News: किती सुनाइये दुखड़े अपणे, कणका री फसलां से सुरवां रा हसणा

Tue, 05 Nov 2024 11:33 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर के संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में आयोजित साहित्यिक एवं
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-बिलासपुर में पहाड़ी सप्ताह का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
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-जिलेभर से 25 कवियों ने रचनाएं और लोकगीत किए प्रस्तुत

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर द्वारा संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में पहाड़ी सप्ताह के अंतर्गत एक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। साहित्य शिरोमणि डॉ. लेखराम शर्मा की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम के का पहले सत्र में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन के रूप में आयोजित किया गया। इसमें जिलेभर से 25 कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। दूसरे सत्र में लोकगीतों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन रविंद्र कुमार शर्मा ने किया।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर मां सरस्वती की वंदना से की गई। जीत राम सुमन ने किती सुनाइये दुखड़े अपणे, “कणका री फसलां से सुरवां रा हसणा, रवीन्द्र कुमार शर्मा ने निक्के रिया मुन्नियां रा आया ब्याह, एसआर आजाद ने न रहे से घर-बार तीज- त्योहार,रविन्द्र कुमार ठाकुर ने सच बोलो तां गल्ल कऊड़ी लगदी, डॉक्टर अनीता शर्मा ने अर्धनारीश्वर, मैंने अब ये जरूर जाना है दुख में मर्द भी रोते हैं, प्रकाश शर्मा ने लोक गीत तेरा मेरा लगन हो सबणा शिवे बनाया है, कौशल्या कुमारी ने मैं आज के युग की नारी हूं, सुरेन्द्र मिन्हास ने शराबी जो जे चांगा सुनी जान्दी तां तिसरी जीभ लपाखी जान्दी पर बेहतरीन प्रस्तुति दी। इसके अलावा बंदना कुमारी,संदेश शर्मा,कौशल्या देवी,सचिन कश्यप ने भी अपनी कविताएं और लोकगीत प्रस्तुत किए।
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कार्यक्रम में कुलदीप चंदेल ने रात जान्दी रही याद ओन्दी रही, फूला चंदेल ने चंगरा तलाईया अम्मा नो कौल फूल फुबया, रविंदर भट्टा ने ये गल्ला सुपने ही हुई गइया, सुशील पुंडीर ने तुह बाज्जी ज्यू नीं लगदा,कर्ण चंदेल ने काले बदला च रल फिरदी, अनीश ठाकुर ने लुखाई लेंदा मैं अपने गम सारे,अरुण डोगरा रीतु ने हर साले साही इस बरी भी रखया करवाचौथ पर अपनी प्रस्तुति दी। आनंद सोहड़ व्याकुल ने पैरा ते पताणी जिंदडी किया कटणी नमाणी जिंदडी परअपनी प्रस्तुति दी।
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डॉ. लेख राम शर्मा ने पहाड़ी भाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस भाषा के शब्दों पर वैदिक संस्कृत का प्रभाव है। उन्होंने पहाड़ी भाषा की समृद्धि की प्रशंसा की और कहा कि यह सभी भाषाओं को समेटे हुए है। अंत में, जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने पहाड़ी दिवस की शुभकामनाएं दी।
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