अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने शरीर की रक्षा प्रणाली में होने वाले ऑटोइम्यून और सूजन संबंधी गंभीर रोगों के रहस्यों को सुलझाने के लिए एक बड़ा शोध अभियान शुरू किया है। इस परियोजना के लिए एम्स प्रबंधन ने देशभर के प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को संस्थान के साथ जुड़ने का औपचारिक न्योता दिया है।
संस्थान का मुख्य उद्देश्य शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में होने वाले असंतुलन को समझना और इसे दोबारा ठीक करने के लिए नई उपचार विधियां विकसित करना है। यह राष्ट्रीय महत्व का संस्थान अब बुनियादी शोध और मरीजों के इलाज के बीच की कड़ी को और मजबूत करेगा। इस अभियान में गठिया, चर्म रोग, ग्रंथि विज्ञान और कैंसर रोग के विशेषज्ञ एक ही छत के नीचे शोध करेंगे। शोधकर्ताओं को सूक्ष्म कोशिकाओं के व्यवहार और आनुवांशिक बनावट को समझने के लिए देश की सबसे आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी। हड्डियों, मांसपेशियों, त्वचा और थायराइड से जुड़ी उन जटिल बीमारियों का समाधान ढूंढना जिन्हें अब तक असाध्य माना जाता था। एम्स बिलासपुर के अनुसंधान केंद्र को दुनिया की बेहतरीन मशीनों से लैस किया गया है।
यहां कोशिकाओं की छंटनी करने वाली प्रणाली, अगली पीढ़ी की अनुक्रमण सुविधा और जीवित कोशिकाओं के छायांकन जैसी उन्नत तकनीकें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों की मदद से वैज्ञानिक यह देख पाएंगे कि बीमारी की शुरुआत कोशिका के किस स्तर पर हो रही है, जिससे सटीक दवा तैयार करने में मदद मिलेगी।
शरीर की अपनी कोशिकाओं के खिलाफ प्रतिक्रिया से होने वाली बीमारियां अक्सर लंबी और खर्चीली होती हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एम्स ने समर्पित शोधकर्ताओं से टीम का हिस्सा बनने की अपील की है। इच्छुक विशेषज्ञ और वैज्ञानिक संस्थान के संबंधित ईमेल पते dr.ravi.rheumat@aiimsbilaspur.edu.in पर संपर्क कर इस अभियान से जुड़ सकते हैं।