डिजिटल स्पाइरोमीटर मशीन पूरी तरह पोर्टेबल है, इससे डॉक्टर मरीज के बिस्तर पर ही फेफड़ों की जांच कर सकेंगे। इससे बुजुर्ग, कमजोर और गंभीर अवस्था में भर्ती मरीजों को जांच के लिए बार-बार ओपीडी या लैब तक नहीं जाना पड़ेगा। मशीन में प्री और पोस्ट ब्रोंकोडायलेटर टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। इसके जरिए मरीज को दवा देने से पहले और बाद में फेफड़ों की कार्यक्षमता की तुलना की जा सकेगी। इससे डॉक्टर यह तुरंत आकलन कर पाएंगे कि मरीज को दी गई दवा कितना असर कर रही है और उपचार में किस तरह का बदलाव जरूरी है।
डिजिटल स्पाइरोमीटर मशीन एफवीसी, एफईवी-1 सहित 15 से अधिक महत्वपूर्ण मापदंडों पर जांच करेगी। इससे डॉक्टर यह स्पष्ट रूप से तय कर सकेंगे कि मरीज को अस्थमा है, सीओपीडी है या कोई अन्य गंभीर फेफड़ों की बीमारी। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा।एम्स में बड़े ऑपरेशन के लिए आने वाले मरीजों के फेफड़ों की क्षमता का आकलन भी इस मशीन के माध्यम से किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मरीज के फेफड़े सर्जरी के दौरान पड़ने वाले दबाव को सहन करने में सक्षम हैं या नहीं, जिससे ऑपरेशन से जुड़े जोखिम कम होंगे।