संस्थान ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट-I (नॉन-मेडिकल) के एक पद पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम आज के समय में किशोरियों और युवा महिलाओं में सबसे आम विकारों में से एक बन चुका है। देश में विभिन्न अध्ययनों के अनुसार इसकी व्यापकता 9 से 22 प्रतिशत के बीच आंकी गई है, जो चिंता का विषय है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में मासिक धर्म का अनियमित होना, हार्मोन असंतुलन, चेहरे पर मुंहासे, शरीर पर अनचाहे बाल, वजन बढ़ना और मानसिक तनाव शामिल हैं। अनियमित खानपान, फास्ट फूड की बढ़ती आदत, शारीरिक निष्क्रियता और बढ़ता तनाव इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।
संस्थान के अनुसार इस शोध का शीर्षक किशोरियों में पीसीओएस पर समग्र जीवनशैली हस्तक्षेप बनाम सामान्य देखभाल है, जिसके तहत दोनों तरीकों की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। किशोरियों को दो समूहों में विभाजित किया जाएगा। पहले समूह को होलिस्टिक लाइफस्टाइल इंटरवेंशन दिया जाएगा, जिसमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, व्यवहार परिवर्तन और निरंतर मॉनीटरिंग शामिल होगी। दूसरे समूह को केवल सामान्य चिकित्सा सलाह प्रदान की जाएगी। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि क्या संरचित जीवनशैली हस्तक्षेप पीसीओएस के लक्षणों में अधिक प्रभावी सुधार ला सकता है या नहीं। इस प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर हैं, जिनके नेतृत्व में यह शोध कार्य किया जाएगा।