बिलासपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आमजन और रसूखदारों के लिए कोविड के दौरान अलग-अलग नियम बरते जा रहे हैं। एक तरफ जहां अस्पताल में आने वाले किसी भी आमजन को बिना कोविड टेस्ट के भर्ती करना तो दूर, उसकी जांच भी नहीं की जाती है। वहीं 9 दिसंबर को सदर विधायक को पेट दर्द के चलते अस्पताल में बिना कोविड टेस्ट के भर्ती कर लिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि स्वास्थ्य विभाग आम और खास में फर्क कर काम कर रहा है।
जानकारी के अनुसार 9 दिसंबर को सदर विधायक सुभाष ठाकुर की अचानक तबीयत खराब हुई। इसके बाद इलाज के लिए उन्हें जिला अस्पताल के स्पेशल वार्ड में भर्ती किया गया। लेकिन हैरानी का विषय यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने 9 और 10 दिसंबर को विधायक का कोरोना टेस्ट नहीं किया। विभाग के अधिकारी का कहना है कि उन्होंने 9 दिसंबर को विधायक को भर्ती करने से पहले इनका रैपिड एंटीजन से कोविड टेस्ट लिया था। लेकिन 9 और 10 दिसंबर की कोविड टेस्ट एंट्री लिस्ट में विधायक का नाम ही नहीं है। इससे पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने को लेकर कितना संजीदा है।
एमएस बिलासपुर नरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि विधायक को पेट दर्द के चलते 9 दिसंबर को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। इसी दौरान उनका रैपिड एंटीजन से कोविड टेस्ट लिया गया है। इसकी रिपोर्ट निगेटिव है। बताते चलें कि 9 और 10 दिसंबर को जिला अस्पताल में जो रैपिड एंटीजन के टेस्ट की एंट्री हुई थी, उसमें विधायक का नाम नहीं है।