बिलासपुर। अधिवक्ता राजेंद्र हांडा की आईजीएमसी में मौत पर सवाल उठने लगे हैं। बिलासपुर नगर के सुप्रसिद्ध समाजसेवी एवं आपातकाल में 19 महीने जेल काटने वाले वरिष्ठतम अधिवक्ता राजेंद्र कुमार हांडा की मौत की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है।
वरिष्ठ एडवोकेट एवं पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष होशियार सिंह ठाकुर ने कहा कि राजेंद्र हांडा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से परिजनों और बिलासपुर नगर में सरकार और स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष है। मृतक के पुत्र अधिवक्ता विपुल कुमार हांडा ने आरोप लगाया है कि उनके पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के लिए आईजीएमसी प्रबंधन एवं संबंधित डॉक्टर उत्तरदायी हैं। इसलिए आईजीएमसी चिकित्सा अधीक्षक को लिखित जवाब देना चाहिए। बताना चाहिए कि राजेंद्र हांडा की मौत किन परिस्थितियों में कब और कैसे हुई। परिजनों को 6 घंटे बाद सूचना देने के पीछे क्या कारण है। होशियार सिंह ठाकुर ने कहा कि विपुल कुमार हांडा ने गंभीर आरोप लगाया है कि उनके पिता की आंख पर चोट का निशान था और उनका मोबाइल भी कोविड सेंटर से गायब पाया गया है। जबकि खाने के लिए बहुत ही घटिया भोजन दिया जाता था। जिसे वे चबा तक नहीं सकते थे। जांच किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके।
होशियार सिंह ठाकुर ने मांग की है कि प्रदेश के सभी कोविड सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि राजेंद्र हांडा की मौत से संदेह पैदा हो रहा है कि कोविड रोगियों को बिना इलाज मरने के लिए कोविड सेंटरों में छोड़ा जा रहा है। होशियार सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस संदिग्ध मौत की तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाएं। सभी सार्वजनिक स्थलों, बसों, अस्पतालों, मोटर बोटों और कोविड सेंटरों को सैनिटाईज करने की उपयुक्त व्यवस्था की जाए।
उधर, आईजीएमसी के एमएस डॉ. जनकराज ने बताया कि मृतक के परिजनों ने कोई शिकायत नहीं दी है। अगर कोई शिकायत आती है तो जांच करवाई जाएगी। मोबाइल गुम होने की शिकायत मृतक के परिजनों ने पुलिस को दे दी है।