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Bilaspur News: माता सीता की खोज में समुद्र पार कर लंका पहुंचे हनुमान

Sun, 28 Sep 2025 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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डियारा में आयोजित रामलीला का दृश्य। संवाद
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मंच पर जब हनुमान जी ने किया सियापति रामचंद्र की जय का उद्घोष
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प्रभु राम द्वारा दी गई मुद्रिका देखकर भर आई सीता जी की आंखें
राम नाटक मंचन की छठी संध्या में दर्शाए गए कई भावुक दृश्य

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में चल रहे राम नाटक मंचन की छठी संध्या भक्तिमय रही। सैकड़ों की संख्या में जुटे श्रद्धालु और दर्शक उस समय भावविभोर हो उठे जब मंच पर अशोक वाटिका का प्रसंग जीवंत किया गया। कलाकारों की दमदार संवाद-अदायगी और भव्य मंच सज्जा ने पूरे वातावरण को श्री राम भक्ति से सराबोर कर दिया।
माता सीता की खोज में समुद्र पार कर लंका पहुंचे हनुमान जी ने अशोक वाटिका में उन्हें देखा। मंच पर जब हनुमान जी ने सियापति रामचंद्र की जय का उद्घोष किया, तो पंडाल तालियों और जयघोष से गूंज उठा। सीता जी, जो पहले ही रावण के छल की पीड़ा से गुजर रही थीं, इसे रावण की नई चाल समझ बैठीं और हनुमान को रावण का दूत कहा। लेकिन जैसे ही हनुमान जी ने प्रभु राम द्वारा दी गई मुद्रिका (अंगूठी) प्रस्तुत की, सीता जी की आंखें भर आईं और उनका विश्वास दृढ़ हो गया कि प्रभु ने ही उन्हें भेजा है। इस दृश्य की भावुकता ने दर्शकों को गहराई तक छू लिया। इसके बाद हनुमान जी का उग्र रूप मंच पर दिखाई दिया। भूख से व्याकुल होकर उन्होंने पूरी अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया। मंच पर पेड़ों की तोड़-फोड़ और हनुमान जी का अद्भुत नृत्य दर्शकों में रोमांच जगा रहा था। तभी रावण का पुत्र मेघनाथ वहां पहुंचा और हनुमान को अपने नागपाश में बांधकर रावण की सभा में ले गया। कलाकारों ने मेघनाथ और हनुमान के बीच संवादों को जोरदार अंदाज में प्रस्तुत किया। सभा में रावण, अशोक वाटिका के विध्वंस से क्रोधित हुआ और हनुमान की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। जैसे ही हनुमान की पूंछ में अग्नि जलाई गई, मंच पर अग्नि-प्रभावों का अद्भुत संयोजन दिखा।
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हनुमान जी ने आग लगी पूंछ के साथ लंका को चारों ओर से दहकते अग्नि-तांडव में झोंक दिया। यह दृश्य इतना प्रभावशाली था कि पंडाल में बैठे बच्चे और बड़े सभी तालियों और जय बजरंगबली के नारों से गूंज उठे। अंतिम दृश्य में हनुमान जी लौटकर श्री राम के शिविर पहुंचे और माता सीता की स्थिति का संपूर्ण वृत्तांत सुनाया। इसके बाद श्रीराम द्वारा लंका पर चढ़ाई की रणनीति बनाने का मनोहारी मंचन किया गया। संध्या में कोऑपरेटिव बैंक के निदेशक सुनील शर्मा बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे।
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