घुमारवीं सिविल कोर्ट ने मामले में सुनाया फैसला
बिलासपुर। घुमारवीं की वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश की अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने करीब 13 वर्ष पुराने भूमि विवाद में दीवानी वाद खारिज कर दिया। वादी पक्ष अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश करने में विफल रहा।
यह मामला गांव भटवाड़ा की 7 बीघा 10 बिस्वा भूमि से जुड़ा था। वादी पक्ष ने खुद को प्रतिवादी के साथ भूमि का आधा हिस्सेदार बताया था। उन्होंने वर्ष 1999 में शुरू हुई विभाजन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वादी ने आरोप लगाया कि उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। वर्ष 2007, 2012 और 2013 के आदेश उनकी अनुपस्थिति में जारी हुए। प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि भूमि का विभाजन विधि के अनुसार हुआ था। विभाजन के बाद दोनों पक्षों को अलग-अलग कब्जा भी दिया गया था। इंतकाल और जमाबंदी भी दर्ज की जा चुकी है।
साक्ष्य का अभाव
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वादी ने चुनौती दिए गए आदेशों की प्रमाणित प्रतियां पेश नहीं कीं। विभाजन की मूल कार्रवाई के दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने कहा कि केवल आरोप किसी आदेश को अवैध नहीं ठहरा सकते। ठोस दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य आवश्यक होते हैं। वादी केवल एक औपचारिक गवाह पेश कर सका।
वाद खारिज होने के कारण
पेश किया गया बिजली कनेक्शन संबंधी रिकॉर्ड भूमि विवाद साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं था। वादी अन्य आवश्यक साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके चलते उसकी साक्ष्य बंद कर दी गई। वादी अपने स्वामित्व, कब्जे और कारण-ए-दावा को भी साबित नहीं कर पाया। अदालत ने स्थायी निषेधाज्ञा देने का कोई आधार नहीं पाया।