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Bilaspur News: घुमारवीं में ठगी का नया जाल, महिला गिरोह के निशाने पर टैक्सी चालक

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क्यूआर कोड से उड़ रहे हजारों रुपये, लोकल नंबरों से कॉल कर जीत रहे भरोसा
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बीमारी और आपात स्थिति का बहाना बनाकर रच रहे साजिश

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों ठगी का एक नया और बेहद शातिर तरीका सामने आया है। क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित गिरोह खास तौर पर टैक्सी चालकों को निशाना बना रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह में ज्यादातर महिलाएं शामिल बताई जा रही हैं, जो बेहद सुनियोजित तरीके से पूरी वारदात को अंजाम दे रही हैं।
ठगी की शुरुआत शहर के किसी बड़े दुकानदार को किए गए फोन कॉल से हुई। कॉल करने वाली महिला ने खुद को दुकानदार की रेगुलर कस्टमर बताया और दावा किया कि वह पहले भी कई बार सामान ले चुकी है। बातचीत के दौरान उसने नजदीकी क्षेत्र का सटीक विवरण देकर दुकानदार का विश्वास जीता। इसके बाद कहा कि घर में कोई नहीं है, वह बीमार है और दवाइयां या जरूरी सामान लाने वाला भी कोई नहीं है। दुकानदार से आग्रह किया कि किसी विश्वसनीय टैक्सी चालक के माध्यम से दवाई या अन्य सामान भिजवा दें। दुकानदार ने भी मानवीय आधार पर अपने जान-पहचान के टैक्सी चालक को महिला का नंबर देकर संपर्क कराया। यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू हुआ। महिला ने चालक को बाजार से दवाइयां या अन्य सामान खरीदने को कहा। जैसे ही चालक सामान लेकर चलने लगा तो उसे बताया गया कि रास्ते में उसका कोई परिचित व्यक्ति अतिरिक्त सामान के साथ खड़ा है, उसे भी साथ ले आना। चालक काफी देर इंतजार करता है, लेकिन वहां कोई नहीं पहुंचा। तभी महिला का दोबारा फोन आया।
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इस बार महिला ने बताया कि उसकी बेटी सुंदरनगर या शिमला बस स्टैंड पर है और किसी दुकान पर सामान ले रही है, लेकिन उसके पास पैसे कम पड़ गए हैं। इसके बाद महिला एक क्यूआर कोड भेजती है और चालक से 500 या 1000 रुपये ट्रांसफर करने का अनुरोध करती है। वह भरोसा दिलाती है कि घर पहुंचने पर पूरा हिसाब कर दिया जाएगा लेकिन असली ठगी यहीं से होती है। जो क्यूआर कोड 1000 रुपये का बताया जाता है, वह वास्तव में हजारों रुपये का बना होता है। जैसे ही चालक कोड स्कैन कर यूपीआई पिन डालता है, उसके खाते से हजारों रुपये कट जाते हैं। पिछले कुछ दिनों में कई टैक्सी चालक इस जाल में फंस चुके हैं। कभी बेकरी का सामान, कभी पेंट, तो कभी दवाइयों का बहाना हर बार कहानी अलग, लेकिन तरीका एक ही। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कॉल स्थानीय मोबाइल नंबरों से की जा रही हैं। लोकल नंबर देखकर दुकानदार और चालक आसानी से भरोसा कर लेते हैं। कुछ सतर्क चालकों ने समय रहते खुद को बचा लिया, लेकिन कई को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस संगठित ठगी से शहर के टैक्सी चालकों में हड़कंप है। टैक्सी यूनियन और स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस महिला गिरोह की जल्द पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई और इस ठगी का शिकार न हो।
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कोट
ऐसी कोई भी शिकायत नहीं आई है, जब भी कोई ऐसी शिकायत आएगी उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। लोग भी थोड़ा सतर्क रहें। किसी को भी ऐसा लगता है कि कोई धोखाधड़ी हो सकती है तो तुरंत पुलिस थाना में संपर्क कर सकते हैं।
विशाल वर्मा, डीएसपी, घुमारवीं
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