फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फोरलेन मुआवजा मामला : सोमवार को बिजली बोर्ड की जांच समिति खंगालेगी रिकॉर्ड

Fri, 09 Jan 2026 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
एक्सक्लूसिव
विज्ञापन

परियोजना में मकान का मुआवजा मिलने के बाद भी बिजली मीटर है सुचारू
अधिग्रहण नियम के अनुसार बिजली, पानी कनेक्शन कटने के बाद मिलता है कब्जा
तहसीलदार घुमारवीं अपनी रिपोर्ट में मकान मौके पर होने की कर चुके हैं पुष्टि

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत बिलासपुर जिले के मौजा रोहिण (कंदरौर) में मुआवजे और मकान ध्वस्तीकरण मामले में प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड ने कड़ा रुख अपनाया है। बोर्ड के अधीक्षण अभियंता (ऑपरेशन सर्कल बिलासपुर) ने एक विशेष विभागीय जांच समिति का गठन किया है, जो 12 जनवरी 2026 को कंदरौर में मामले की जमीनी हकीकत खंगालेगी।
आरोप है कि एक रसूखदार ने विभाग के साथ मिलीभगत कर अपने मकान का पूरा मुआवजा तो प्राप्त कर लिया, लेकिन मकान को मौके से ध्वस्त नहीं किया गया। इतना ही नहीं, जिस मकान को कागजों में खत्म दिखाया गया, वहां आज भी बिजली विभाग के मीटर की सप्लाई सुचारू है। इस पूरे विवाद की जड़ में वर्ष 2002 में लगा एक बिजली कनेक्शन है। नियमों के मुताबिक, जब फोरलेन की जद में आने वाले किसी मकान का मुआवजा आवंटित हो जाता है, तो सबसे पहले वहां का बिजली और पानी का कनेक्शन काटकर मकान को एनएचएआई को सौंपा जाता है। लेकिन रोहिण के इस मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2002 में लगा बिजली का मीटर आज भी रिकॉर्ड में सुचारू है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि मकान को कभी गिराया ही नहीं गया और बिजली विभाग के रिकॉर्ड में भी इसे डिस्कनेक्ट नहीं किया गया। मामले में नया मोड़ तब आया जब तहसीलदार घुमारवीं ने अपनी मौका रिपोर्ट में पुष्टि की कि संबंधित मकान आज भी धरातल पर मौजूद है।
विज्ञापन

रिपोर्ट के अनुसार, मकान का केवल एक आंशिक हिस्सा (शौचालय) सड़क निर्माण की जद में आया था, लेकिन पूरे मकान का मुआवजा आवंटित कर दिया गया। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुआवजा ले लिया गया था, तो न तो मकान मालिक ने इसे ध्वस्त किया और न ही एनएचएआई ने इसका कब्जा लिया।
विज्ञापन

विद्युत बोर्ड द्वारा गठित दो सदस्यीय कमेटी जिसकी अध्यक्षता एसडीओ विद्युत मंडल-2 कर रहे हैं को 10 दिन के भीतर सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट देने को कहा गया था। जांच का विषय यह है कि क्या वर्ष 2002 में लगा बिजली मीटर अधिग्रहण के समय नियमानुसार हटाया गया था या नही? मौके पर बिजली आपूर्ति किस आधार पर जारी रही और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? मौके पर मौजूद बुर्जियों, जीपीएस कॉर्डिनेट्स और गूगल इमेजेस (2013 व 2025) का मिलान कर मकान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के अलावा मकान की मूल्यांकन सीट मूल है। बिजली बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, 12 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे विद्युत उप-मंडल कंदरौर के कार्यालय में जांच समिति मौजूद रहेगी। समिति ने संबंधित उपभोक्ता और शिकायतकर्ता को तमाम लिखित दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ तलब किया है। इस दौरान अधिशासी अभियंता घुमारवीं भी रिकॉर्ड के साथ उपस्थित रहेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें