-फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने आरटीआई डालकर ली जानकारी
-समिति ने मामले को लेकर 2023 में खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान से यातायात शुरू होने तक विभिन्न हादसों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। सड़क निर्माण और यातायात की बढ़ती परेशानी मुख्य कारण बताई जा रही है।
आरटीआई में सूचना लेने वाली समिति का कहना है कि इस परियोजना में सुरक्षा उपायों की गंभीर कमी रही, जिसके कारण कई हादसे हुए। लेकिन इसका खुलासा तभी होगा, जब डीपीआर की कॉपी एनएचएआई उन्हें देगा। उसकी समीक्षा में सारे कारण सामने आएंगे। फोरलेन निर्माण के दौरान निजी हितों के कारण रूट के अलाइनमेंट में बदलाव किया गया, जो इस सड़क के कई हिस्सों के लिए जानलेवा साबित हुआ। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल ने कहा कि एनएचएआई ने गैरकानूनी तरीके से सड़क संयोजन रूट को निजी हितों के लिए बदला। इस बदलाव के कारण श्री नयना देवी जी के डडनाल जंगल में भू-स्खलन हुआ, जिसमें दो लोगों की जान चली गई। समिति ने बताया कि वर्तमान में भी उस स्थान पर एक तरफा रूट चलता है, जिससे यातायात की स्थिति और भी विकट हो गई है। समिति ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में 2023 में अपील दायर की है। कोर्ट में दायर याचिका में यू-टर्न, अलाइनमेंट रूट बदलाव, स्ट्रीट बेरिकेड्स, रिटेनिंग वॉल्स, पहाड़ी से भूस्खलन रोकने के लिए जाली, अंडरपास, फुट ब्रिज, स्ट्रीट लाइट, फुट पाथ रेलिंग, और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है। मदन लाल ने कहा कि फोरलेन परियोजना के निर्माण के दौरान हुई दुर्घटनाओं ने सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी और स्थानीय घटनाओं से पता चलता है कि इस क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसों के लिए सड़क निर्माण कंपनी और एनएचएआई की लापरवाही मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार 2014 से 2024 के बीच झंडूता विधानसभा, श्री नयना देवी जी, थाना सदर बिलासपुर क्षेत्र में सड़क हादसों और निर्माण कार्य से जुड़ी दुर्घटनाओं में पांच मौतें हुई हैं। मदन लाल ने कहा कि इस फोरलेन पर आम जनता और पशुओं के लिए सुविधाओं का अभाव है। सड़क के दोनों ओर सुरक्षा उपायों की कमी जैसे फुटपाथ, फुटब्रिज, अंडरपास, स्ट्रीट लाइट, और स्टील बैरिकेड्स जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पशुओं और जंगली जानवरों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार पानी की निकासी के लिए कलवर्ट और नालियों का निर्माण नहीं किया गया, जिसके कारण किसानों की उपजाऊ भूमि और मकान प्रभावित हो रहे हैं। समिति का कहना है कि एनएचएआई ने अपने निजी हितों के लिए गैरकानूनी तरीके से रूट बदला और प्रभावितों को बिना सूचना दिए कई निर्णय लिए। सड़क निर्माण कंपनी ने डीपीआर के अनुसार काम नहीं किया, जिससे हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है।
इनसेट
हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन
समिति ने इन मुद्दों को लेकर उच्च न्यायालय में अपील की है। समिति ने उक्त फोरलेन की डीपीआर की समीक्षा करने और एनएचएआई के कार्यों की जांच के लिए इसकी मांग की है। हादसों में घायल और मृतकों के परिवारों को जल्द मुआवजा दिलाने के लिए न्यायालय से प्राथमिकता पर सुनवाई की गुहार लगाई गई है।