बिलासपुर। मत्स्य पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार कृतसंकल्प है। वर्ष 2013-14 में गोबिंद सागर में अधिकतम मत्स्य उत्पादन 1492 मीट्रिक टन था। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2019-20 तक लगातार इसके उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2019-20 में न्यूनतम 237 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 से उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालांकि मत्स्य उत्पादन में गिरावट होने के कई कारण हैं जिनमें कोलडैम बांध निर्माण की वजह से समय-समय पर डैम से पानी छोड़ने के कारण पानी का बहाव तेज होता है। इससे मछुआरों द्वारा लगाए गए जाल अस्त-व्यस्त हो जाते हैं। मछुआरों को मछली पकड़ने में बाधा उत्पन्न होती है और मछली व्यवसाय पर भी इसका असर पड़ता है। दूसरा जलाशय में सिल्ट और कम वर्षा के कारण मछली प्रजनन व आहार क्षेत्र नष्ट हो रहे हैं। गोबिंद सागर जलाशय में कम वर्षा होने के कारण जलस्तर में कमी आ रही है। इससे फिशिंग प्रयास कम हो गए हैं और इसका विपरीत असर मत्स्य उत्पादन पर हो रहा है।
कहा कि मुश्किलों के समाधान के लिए सिफरी बैरकपुर, कोलकाता से वैज्ञानिक अध्ययन करवाया जा रहा है, जिसकी फाइनल रिपोर्ट विभाग को शीघ्र प्राप्त होने वाली है। उनसे प्राप्त सिफारिशों के अनुरूप विभाग अग्रिम कार्रवाई अमल में लाएगा। वर्ष 2017-18 के बाद से प्रतिवर्ष निरंतर बढ़े आकार का उत्तम गुणवत्ता वाला मत्स्य बीज जलाशयों में डाला जा रहा है। वर्ष 2019-20 में 17.84 लाख व वर्ष 2020-21 में 22.67 लाख व वर्ष 2021 -22 में 20.07 लाख मत्स्य बीज प्रदेश के जलाशयों में संग्रहित किया गया है। इस वर्ष प्रदेश में लगभग 50 लाख मत्स्य बीज संग्रहित किया जाएगा। इससे मत्स्य उत्पादन में बढ़ोतरी होने की आशा है।