वन परिक्षेत्र झंडूता के अधीन 12 वन बीटों में संबंधित विभाग ने गर्मी के मौसम में वनों को आग से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम कर दिए हैं। 12 वन बीटों में 9 फायर वाचरों की नियुक्तियां की गई है।
फायर वाचर आग लगने की घटनाओं पर नजर रखेंगे। यदि कहीं आग लगती है तो वह फायर बिग्रेड को सूचना देने के साथ आग बुझाने का प्रयास करेंगे। इस के लिए वह स्थानीय महिला और युवक मंडलों का सहयोग लेंगे। झंडूता वन परिक्षेत्र की झंडूता, राहन, समोह, थुरान, डाहाड, बरवाड़, झौला, बरठीं, घंढीर, गोचर, झंबोला और शाहतलाई वन बीटों की 30 हजार हेक्टेयर वन भूमि आती है। इन जंगलों में सबसे ज्यादा चीड़ और खैर के पेड़ हैं।
इसके अलावा आंवला बेहड़ा, अर्जुन जैसे अन्य औषधीय पौधे जंगलों में लहराते है। हर साल आग की भेंट सैकड़ों पेड़ चढ़ जाते हैं। साथ ही हजारों जंगली जीव जंतु आग में जल कर राख हो जाते हैं। ज्यादातर जंगली जीव जंतु और पक्षी गर्मियों के मौसम में ही प्रजनन क्रिया करते हैं। बढ़ती आग की घटनाओं से पक्षियों की संख्या भी घट रही है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई लोग जंगल के पास अपनी निजी भूमि में पुरानी घास को जलाने के लिए आग लगाते हैं, जो कई बार जंगल तक फैल जाती है। इससे जहां विभाग की ओर से बरसात के मौसम में लगाई गई नई पौध नष्ट हो जाती है, वहीं जंगलों में पुराने पेड़ भी कमजोर हो जाते हैं।
वन परिक्षेत्र अधिकारी झंडूता देशराज ने बताया कि 12 वन बीटों में विभाग ने जंगलों को आग से बचाने के लिए 9 फायर वाचरों की नियुक्ति की है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के साथ महिला मंडलों युवा मंडलों का आग बुझाने में सहयोग मिलता है। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति जंगलों के 200 मीटर के नजदीक अपनी निजी भूमि में पुरानी घास के साथ अन्य उगी झाड़ियों को नहीं जला सकता है। ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ विभाग कड़ी कार्रवाई कर सकता है।