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पूर्व विंग कमांडर ग्रेवाल ने साल भर गुजारा था पाक जेल में

Wed, 06 Mar 2019 03:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, रामपुर, उत्तर प्रदेश
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पूर्व विंग कमांडर ग्रेवाल
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विंग कमांडर अभिनंदन से पहले कई भारतीय पायलट भी पाकिस्तान की गिरफ्त में आ चुके हैं। अभिनंदन तो कुछ घंटों में ही पाकिस्तान से लौट आए, लेकिन अन्य पायलटों को वहां भारी मुसीबत झेलनी पड़ी। पाकिस्तानी सेना का जुल्म झेलकर वापस लौटने वालों में एक है 

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पूर्व विंग कमांडर एमएस ग्रेवाल।  

बिलासपुर के ग्राम भिड़ैया निवासी पूर्व विंग कमांडर एमएस ग्रेवाल 1985 में सेवानिवृत्त हुए। उनका कहना है कि उन्होंने 1965 और 1971 की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। वह बताते हैं कि चार दिसंबर 1971 के युद्व के दौरान पर उनका लड़ाकू विमान पाकिस्तान में क्रैश हो गया था और वह अपने 11 अन्य साथियों के साथ पाकिस्तान में पैराशूट कह मदद से कूद गए थे और वह पाकिस्तान के शोरकोट रोड पर गिरे थे। 

उन्हें पाकिस्तान के लोगों ने पकड़ लिया था और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया था। इससे पहले कि पाकिस्तान की अवाम उन्हें ज्यादा नुकसान पहुंचाती कि पाकिस्तान की सेना पहुंच गई और उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके 11 अन्य पायलट साथियों के साथ भी उन्होंने कैदियों जैसा बर्ताव किया था। 
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सभी को रावलपिंडी की जेल में बंद कर दिया था, जहां वह एक साल तक रहे थे। 14 अगस्त 1972 को पाकिस्तान के लोग जश्न में डूबे हुए थे और वह दो अन्य साथियों के साथ जेल की दीवार काटकर भाग निकले थे, मगर  लंदी कोतल नामक शहर में पकड़े गए और सेना ने उन्हें फिर लैलपुर वर्तमान में वह जगह अब फैसलाबाद है कि जेल में कैदी बनाकर डाल दिया। 

उनका आरोप है कि वहां के लोगों के साथ साथ वहां की सरकार व प्रशासन ने भी उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया। खानपान भी बिल्कुल खराब था, मगर जिंदा रहने के लिए खाना खाना उनकी मजबूरी थी।

एक दिसंबर 1972 को उनकी रिहाई हुई थी। उनका कहना है कि उस वक्त भारत में टेलीविजन नहीं हुआ करते थे,म गर पाकिस्तान में टेलीविजन थे। 

उनका कहना है कि वह पाकिस्तान की जेल में रहे जरुर, मगर भारत माता के नारे लगाते रहते थे। उनका कहना है कि वह अब रिटायर होने के बाद अपने फार्म हाउस में खेतीबाड़ी कर रहे हैं और मित्रों के साथ बैठकर पुरानी यादें ताजा कर लेंते हैं।

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