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Bilaspur News: फोरलेन भूमि अधिग्रहण पर बुजुर्ग ने वापस मांगी राइट ऑफ वे से बाहर ली गई जमीन

Mon, 18 May 2026 11:42 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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एनएचएआई, भू-अर्जन विभाग और प्रशासन को भेजी शिकायत
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लिखा, कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के लिए जरूरत से ज्यादा भूमि की अधिग्रहित
सीमांकन और सफेद निशानों पर भी आपत्ति, 65 फीट दूर तक निजी भूमि पर कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में भूमि अधिग्रहण को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। झंडूता उपमंडल के ग्राम छत निवासी 86 वर्षीय कृष्ण राम ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, विशेष भूमि अधिग्रहण इकाई और जिला प्रशासन को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायतकर्ता ने कहा कि सड़क निर्माण के नाम पर उनकी निजी भूमि को राइट ऑफ वे से बाहर जाकर अधिग्रहित किया गया और अब उसे नियमों के तहत दर्शाने की कोशिश की जा रही है। मांग की कि उन्हें उनकी जमीन वापस की जाए।
कृष्ण राम पुत्र लेखू राम निवासी गांव छत डाकघर ऋषिकेश तहसील झंडूता ने यह शिकायत विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी बिलासपुर, तहसीलदार झंडूता, एसडीएम झंडूता समेत प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी है। शिकायत की प्रतियां मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) और उपायुक्त बिलासपुर को भी प्रेषित की गई हैं। शिकायत के साथ स्पीड पोस्ट रसीदें, सीमांकन संबंधी कागजात और मौके से जुड़े दस्तावेज भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने कहा कि फोरलेन निर्माण के लिए जितनी भूमि की वास्तविक आवश्यकता थी, उससे अधिक निजी भूमि को अधिग्रहण की जद में लिया गया। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि दो अलग खसरा नंबरों में मौजूद भूमि को बिना उचित योजना और नियमों के अधिग्रहित किया गया। उन्होंने कहा कि फोरलेन निर्माण, नालियां, पुलियां, कलवर्ट और अन्य ढांचों की वास्तविक स्थिति मौके पर अलग है, जबकि रिकॉर्ड में दूसरी भूमि को प्रभावित दिखाया गया है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मौके पर दोबारा सीमांकन और तकनीकी जांच करवाने की मांग की है। शिकायत है कि विभाग ने सड़क सीमा से करीब 65 फीट दूर तक उनकी निजी भूमि को अधिग्रहण में शामिल कर लिया। शिकायत के अनुसार जिस भूमि को अधिग्रहित दिखाया गया है वहां वर्तमान में सड़क निर्माण नहीं हुआ है और क्षेत्र में केवल झाड़ियां व खाली भूमि मौजूद है।
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उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों को दरकिनार किया गया। शिकायत में एक महिला का जिक्र करते हुए कहा गया है कि निजी हित साधने के लिए अधिग्रहण की सीमा को वास्तविक सड़क क्षेत्र से काफी आगे तक बढ़ाया गया। कहा है कि मौके पर लगाए गए सफेद निशान वास्तविक सड़क सीमा और अधिग्रहण रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। शिकायत में हस्तलिखित टिप्पणियों के माध्यम से यह भी दर्शाने का प्रयास किया गया है कि सड़क की चौड़ाई और अधिग्रहित भूमि के बीच अंतर है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई की संयुक्त टीम मौके पर जाकर नए सिरे से सीमांकन करे ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी निजी भूमि प्रभावित होने के बाद उन्हें नोटिस दिया गया। इससे परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक परेशानी खड़ी हो गई है। वह वरिष्ठ नागरिक हैं और 86 वर्ष की आयु में बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने में असमर्थ हैं। उन्होंने प्रशासन से मानवीय आधार पर जल्द सुनवाई कर न्याय दिलाने की मांग की है। शिकायत में चेतावनी भी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो मामला न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
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इनसेट
डाक रसीदों और दस्तावेजों के जरिए शिकायत का दावा मजबूत करने की कोशिश
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत के समर्थन में विभिन्न विभागों को भेजी गई स्पीड पोस्ट रसीदें भी सार्वजनिक की हैं। इसके अलावा सीमांकन, भूमि की स्थिति और सड़क की वास्तविक चौड़ाई से जुड़े दस्तावेज भी लगाए गए हैं। इन दस्तावेजों में यह दावा किया गया है कि कुछ स्थानों पर अधिग्रहण की गई भूमि और वास्तविक सड़क निर्माण के बीच बड़ा अंतर है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
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