मानसिक स्वास्थ्य पर एम्स में स्वास्थ्य संवाद, शुरुआती पहचान पर जोर
मानसिक बीमारी से जुड़े मिथकों और सामाजिक कलंक पर हुई चर्चा
समुदाय की भागीदारी और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की पहचान में देरी और मानसिक बीमारी को लेकर समाज में बनी गलत धारणाएं मरीज की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को समय पर मदद लेने के लिए एम्स की मनोरोग ओपीडी में सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य विषय पर स्वास्थ्य संवाद आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, मानसिक बीमारी को लेकर प्रचलित मिथकों और सामाजिक कलंक पर चर्चा की गई। बताया गया कि मानसिक बीमारी को लेकर कई गलत धारणाओं के कारण प्रभावित व्यक्ति अपनी परेशानी बताने या उपचार लेने से बच सकता है। इससे बीमारी की समय पर पहचान और उचित उपचार प्रभावित हो सकता है।
स्वास्थ्य संवाद में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती पहचान पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया कि शुरुआती स्तर पर समस्या की पहचान कर जरूरत के अनुसार व्यक्ति को विशेषज्ञ या स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचाना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे व्यक्ति के प्रति परिवार और समुदाय का सहयोगात्मक रवैया भी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में एम्स के बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के वर्ष 2024 बैच के छात्र रौनक ने स्वास्थ्य संवाद दिया। उन्होंने सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य के पहलुओं की जानकारी दी। इसमें मानसिक बीमारी की शुरुआती पहचान, रेफरल, समुदाय की भागीदारी और उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग के बारे में बताया गया।
स्वास्थ्य संवाद का उद्देश्य सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, मानसिक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समुदाय को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित लोगों की मदद के लिए सशक्त करना रहा। इस दौरान मानसिक बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
टेली-मानस की दी जानकारी
प्रतिभागियों को राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य सेवा टेली-मानस की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध है। इसकी सुविधा निशुल्क है। जरूरतमंद 14416 टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।