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Bilaspur News: नयना देवी मंदिर में हिस्सेदारी विवाद फिर गरमाया, पुजारियों की निष्पक्ष जांच की मांग

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स्थानीय पुजारियों का आरोप - वर्ष 2013 की बदली व्यवस्था से कुछ लोगों को हुआ लाभ, अधिकांश को मिली कम राशि
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न्यायालय में मामला लंबित होने से वर्षों से नहीं हो सका हिस्से की राशि का वितरण
मंदिर संपत्ति के आवंटन में पारदर्शिता की मांग
-पूर्व मंत्री पर दबाव बनाकर आवंटन कराने का आरोप

संवाद न्यूज एजेंसी
श्री नयना देवी (बिलासपुर)। श्री नयना देवी मंदिर के स्थानीय पुजारियों ने मंदिर न्यास की ओर से पुजारियों के हिस्से के धन के आवंटन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुजारी राजेश कुमार शर्मा, भारत भूषण शर्मा, रिंकू शर्मा, विकास शर्मा (विक्की) और मुकेश शर्मा (लकी) ने संयुक्त बयान में कहा कि वर्ष 2013 में करीब 25 वर्षों से चली आ रही हिस्सेदारी व्यवस्था में बदलाव कर नई व्यवस्था लागू की गई। उनका आरोप है कि इससे मंदिर न्यास के तत्कालीन न्यासी पुजारियों को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचा। पुजारियों का दावा है कि कुछ पुजारियों को लाखों रुपये दिए गए, जबकि कुछ को नाममात्र राशि मिली। उनका आरोप है कि अधिकांश पुजारियों को कम राशि देकर उनके साथ भेदभाव किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय तत्कालीन मंत्री के दबाव में अधिकारियों ने आवंटन प्रक्रिया में बदलाव किया।
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पुजारियों का कहना है कि इस मामले को लेकर विवाद पैदा हुआ और बाद में यह प्रकरण विभिन्न न्यायालयों से होते हुए उच्च न्यायालय पहुंचा। वहां धन के आवंटन पर रोक लग गई। उनका दावा है कि पिछले करीब 13 वर्षों से मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण पुजारियों के हिस्से की राशि वितरित नहीं हो सकी और अब यह राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच गई है।
पुजारियों ने आरोप लगाया कि अब फिर से उसी प्रकार धन आवंटन की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में भी कुछ ऐसे लोग मंदिर न्यास के ट्रस्टी हैं, जिन्हें पहले लाखों रुपये का लाभ मिला था। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पुजारी वर्ग का हिस्सा 59 प्रतिशत है, जबकि बारीदारों का हिस्सा 19 प्रतिशत है। इसके बावजूद कुछ चुनिंदा न्यासियों को अधिक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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पुजारियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से ही सभी पुजारियों को न्याय मिल सकेगा और मंदिर की संपत्ति के आवंटन को लेकर उठ रहे विवाद का समाधान हो सकेगा।
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