घुमारवीं (बिलासपुर)। जिले की निजी बस ऑपरेटर यूनियन दोफाड़ होने के कगार पर पहुंच गई है। मार्च 2015 को यूनियन के दो साल के लिए चुनाव हुए थे। लेकिन, चुने गए प्रतिनिधि छह साल बाद भी चुनाव करवाने के पक्ष में नहीं हैं। यूनियन के पूर्व प्रधान का आरोप है कि दो साल के लिए चुनाव हुए थे। तय हुआ था कि इस अंतराल के बाद दोबारा चुनाव होंगे।
पूर्व प्रधान अनिल मिंटू का आरोप है कि छह साल बाद भी वर्तमान प्रधान कुर्सी छोड़ने को राजी नहीं हैं। जिले के कुल 160 बस ऑपरेटर यूनियन के सदस्य हैं। इनकी जिले में 330 बसें लोगों की सुविधाओं के लिए विभिन्न रूटों पर दौड़ रही हैं। यूनियन अब दोफाड़ होने के कगार पर है। एक धड़ा कुछ निजी बस ऑपरेटरों को साथ लेकर आगामी रणनीति तैयार कर रहा है। कुछ दिन पहले बिलासपुर आरटीओ की तरफ से सड़क सुरक्षा अभियान को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें निजी बस ऑपरेटर यूनियन के वर्तमान प्रधान ने अपने करीबियों को आमंत्रित किया था। दूसरे धड़े ने इसका विरोध किया है कि सभी को आमंत्रित किया जाना चाहिए था। अब चुनावों को लेकर चिंगारी भड़क गई है। एक धड़े ने बैठक की तिथि तय कर कुछ ऑपरेटरों को बुलावा भेज दिया है।
पूर्व प्रधान अनिल मिंटू ने कहा कि मार्च 2015 को निजी बस ऑपरेटर यूनियन का चुनाव दो साल के लिए हुआ था। अब शीघ्र बैठक कर चुनावों की तिथि तय की जाएगी। वर्तमान प्रधान राजेश पटियाल ने कहा कि 2015 में चुनाव आठ साल के लिए हुए हैं। कुछ ऑपरेटर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए ऑपरेटरों को भ्रमित कर रहे हैं जो गलत है।