पांच माह पहले पेयजल लाइन का टेंडर, अब तक शुरू नहीं हुआ काम
खराब सड़क से मरीजों और बुजुर्गों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला मुख्यालय के समीप स्थित धमणा गांव के ग्रामीण आज भी सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन के नजदीक होने के बावजूद गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व जिला परिषद सदस्य गौरव शर्मा की अगुवाई में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए प्राकृतिक स्रोत पर निर्भर रहना पड़ता है। स्रोत से गांव तक पानी पहुंचाने के लिए प्लास्टिक की पाइप बिछाई गई हैं। जंगल में आग लगने की स्थिति में कई बार ये पाइप जल जाती हैं। इससे गांव की पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी पाइप लाइन के कारण उन्हें बार-बार पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।
पूर्व जिला परिषद सदस्य गौरव शर्मा ने बताया कि गांव में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए करीब पांच माह पहले टेंडर लगाया जा चुका है। इसके बावजूद अभी तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने प्रशासन से टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम जल्द शुरू करवाने और ग्रामीणों को स्थायी पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि उपायुक्त ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और जल्द समाधान का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से समयबद्ध कार्रवाई कर दोनों समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
खराब सड़क से बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि धमणा गांव को जोड़ने वाली सड़क की हालत भी खराब है। सड़क पर आवाजाही के दौरान लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को होती है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क का निरीक्षण करवाकर आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य शुरू करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क और पेयजल दोनों ही लोगों की मूलभूत जरूरतें हैं। इन समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
जंगल की आग में बार-बार जल जाती है पाइप लाइन
ग्रामीणों के अनुसार प्राकृतिक स्रोत से गांव तक पानी पहुंचाने के लिए प्लास्टिक की पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है। जंगल में आग लगने पर पाइप जल जाती हैं और पानी की आपूर्ति ठप हो जाती है। ग्रामीणों ने स्थायी पेयजल लाइन बिछाने की मांग की है।