प्रदेश सरकार ने इसकी बिक्री पर एक साल के लिए लगा रखा है प्रतिबंध
-इससे होने वाले नुकसान से बेखबर बच्चे शौक से रहे हैं खरीद
-अभिभावकों का कहना, प्रतिबंध के बारे में नहीं कोई जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश में कॉटन कैंडी बनाने और बेचने पर बेशक प्रतिबंध लगा दिया गया हो, इसके बावजूद घुमारवीं में चल रहे राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव में बाहरी राज्यों के प्रवासियों ने अपने छोटे-छोटे बच्चों को कॉटन कैंडी बेचने के काम में लगाया हुआ है। मेले में प्रवासियों के छोटे-छोटे बच्चे इस कॉटन कैंडी को बेखौफ होकर बेच रहे हैं। वहीं, हैरानी की बात तो यह है कि लोग अभी भी बेखबर होकर इस कॉटन कैंडी को खरीद रहे हैं।
मेला मैदान में जहां छोटे-छोटे बच्चे खुद इसको खरीद रहे हैं, वहीं अभिभावक भी बड़े चाव के साथ कॉटन कैंडी खरीद कर अपने बच्चों को देकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कॉटन कैंडी को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसमें खतरनाक केमिकल पाया जाता है। इससे कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है। बताते चलें कि दो राज्यों में कॉटन कैंडी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हिमाचल में भी कुछ जिलों में कॉटन कैंडी के सैंपल भरे गए थे, जो बाद में फेल हो गए थे। सैंपलों के फेल होने के बाद प्रदेश सरकार ने तुरंत प्रभाव से इस पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। परंतु मेलों में कॉटन कैंडी अभी भी बिक रही है। न तो बेचने वालों को इसके प्रतिबंध के बारे में कोई जानकारी है और न ही खरीदने वालों को। यही वजह है कि बाहर से आए प्रवासी बेखौफ होकर कॉटन कैंडी बेच रहे हैं। लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस कॉटन कैंडी को बनाने में खतरनाक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है। हालांकि दो महीने पहले घुमारवीं में भी खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा कुछ प्रवासियों द्वारा बेची जा रही कॉटन कैंडी के सैंपल भरे थे जो बाद में फेल हो गए थे इसके बाद इन कॉटन कैंडी बेचने वालों पर कार्रवाई भी की गई थी। लेकिन घुमारवीं मेले में यह लोग फिर से सक्रिय हो गए हैं।
कोट
कॉटन कैंडी बेचने पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है। इसके तहत कोई भी कॉटन कैंडी नहीं बेच सकता है। मेले में विभाग की टीम इस बात की जांच कर रही है और अगर कोई कॉटन कैंडी बेचता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ नियम अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- केएस ठाकुर, खाद्य सुरक्षा निरीक्षक