23 फरवरी के धरने को सफल बनाने के लिए बनाई रणनीति
विस्थापितों की भूमि का बंदोबस्त करने और लंबित प्लॉट आवंटन की मांग
बीबीएमबी व सरकारी नौकरियों में बच्चों को दिया जाए आरक्षण
-भाखड़ा बांध रॉयल्टी का 25 प्रतिशत विस्थापित कल्याण पर हो खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति की बैठक बहना जट्टां स्थित हनुमान मंदिर परिसर में सुखदेव चंदेल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में समिति के प्रधान देशराज शर्मा और उपाध्यक्ष श्रीराम चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान 23 फरवरी को प्रस्तावित धरने को सफल बनाने के लिए विस्तार से चर्चा की गई और निर्णय लिया गया कि क्षेत्र के अधिक से अधिक विस्थापित इसमें भाग लेंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रधान देशराज शर्मा और उपाध्यक्ष श्रीराम चौहान ने कहा कि ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित पिछले करीब 65 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने उनकी मांगों को पूरा करने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई। विस्थापितों को केवल आश्वासन ही मिले हैं। ऐसे में अब उन्हें अपने हकों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है। कहा कि साठ के दशक में भाखड़ा बांध निर्माण के समय लोगों को बेहतर भविष्य और सुविधाओं के सपने दिखाए गए थे, लेकिन आज तक न तो मूलभूत सुविधाएं मिलीं और न ही समस्याओं का स्थायी समाधान हुआ। समिति ने मांग दोहराते हुए कहा कि वन भूमि पर बने विस्थापितों के मकान, खेती और पशुशालाओं को वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत अधिकार व पट्टे दिए जाएं। भाखड़ा विस्थापितों की भूमि का शीघ्र बंदोबस्त किया जाए और जिन परिवारों को अब तक प्लॉट नहीं मिले हैं, उन्हें तुरंत प्लॉट आवंटित किए जाएं। इसके अलावा काटे गए बिजली और पानी के कनेक्शन बहाल करने तथा विस्थापितों को बिजली-पानी निःशुल्क उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। समिति ने भाखड़ा विस्थापितों के बच्चों को बीबीएमबी और अन्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने तथा भाखड़ा बांध से मिलने वाली रॉयल्टी का 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापितों के कल्याण पर खर्च करने की मांग की। साथ ही बांध से सिंचाई और पेयजल उठाने की अनुमति देने की भी बात कही।
बैठक में भूमिहीन विस्थापितों को भूमि उपलब्ध कराने तथा सतलुज नदी पर बैरी दड़ोलां-लुहणू, ज्योरीपतन, बड़गांव-बुखर, गाह-चलौला, बाला और डैहन-नारल स्थानों पर पुल निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई गई। समिति ने मछुआरों के हितों के लिए विशेष योजना बनाने तथा सतलुज नदी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की आवश्यकता भी जताई। इस अवसर पर तारा चंदेल, प्रकाश चंद, प्यार सिंह, सत्या देवी, चिरंजी लाल, विवेक शर्मा, नंदलाल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।