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Bilaspur News: मन की शुद्धि और मोक्ष का साधन है भागवत

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स्वारघाट (बिलासपुर)। गांव ओखू में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरा दिन कथा व्यास सुनील शर्मा ने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब हम इसे अपने व्यवहार में उतारते हैं। केवल कानों से कथा सुनने मात्र से काम नहीं चलेगा, बल्कि निरंतर हरि स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय और मंगलमय बनाना ही वास्तविक उद्देश्य है।
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श्रीमद्भागवत कथा मन का शुद्धिकरण करती है, जिससे सभी संशय दूर होते हैं और साधक को आत्मिक शांति व मुक्ति प्राप्त होती है। आज के युग में सद्गुरु की पहचान कर उनके बताए मार्ग का अनुकरण करना आवश्यक है। भागवत कथा एक कल्पवृक्ष के समान है, जो जन्म-जन्मांतर के विकारों को नष्ट कर प्राणी का लौकिक एवं आध्यात्मिक विकास करती है। जहां अन्य युगों में मोक्ष के लिए कठिन साधना करनी पड़ती थी, वहीं कलियुग में केवल कथा श्रवण मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार हो सकता है। भागवत पुराण की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि यह भक्ति योग का महाग्रंथ है, जिसमें श्रीकृष्ण को स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का स्वरूप है। कहा कि दुर्लभ मानव जीवन का लाभ तभी है जब हम इसे भगवान की शरण में समर्पित करें।
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