सुंडी रोग के बारे में किसान को जानकारी देता एक कृषि विशेषज्ञ । संवाद
बरठीं/शाहतलाई (बिलासपुर)। जिले में करीब 30 फीसदी मक्की की फसल को सुंडी रोग लग गया है। कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं के वैज्ञानिकों ने बाड़ी, हरलोग, बरठीं, मलांगण, श्री नयनादेवी, घुमारवीं, कलोल, छत आदि जगहों पर सुंडी कीड़े का प्रकोप देखा है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर अब खेतों में सुंडी के खात्मे के लिए कीटनाशक का छिड़काव शुरू कर दिया गया है।कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुमन कुमार, डाॅ. गौरव और डॉ. मनप्रीत ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने पाया कि इस मौसम में सुंडी कीड़ा मक्की में अधिकतर पाया जा रहा है और ज्यादातर किसान इस कीड़े से तंग हैं। सुंडी फसलों को खराब करने वाला कीड़ा है। ये कीड़े टिड्डी की तरह खाने की तलाश में 100 किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर करते हैं। यह कीड़े खेतों में खड़ी फसलों की पत्तियों और भुट्टों को ढकने वाले खोल पर घर बनाते हैं और उन्हें खा जाते हैं। इनके प्रकोप से मक्की की पत्तियों पर सफेद रंग की धारियां बनने लगती हैं। वैसे इन कीड़ों का जीवनकाल सिर्फ 30 से 35 दिन का होता है, लेकिन यह एक ही रात में फसलों को नुकसान पहुंचा देते हैं। खासकर मादा सुंडी फसलों में अंडे देकर समस्या को और बढ़ा देती है।
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ऐसे करे बचाव
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कीड़े की रोकथाम के लिए खेतों की समय-समय पर निगरानी करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि जैविक कीट नियंत्रण के लिए खेत में नीम से बने कीटनाशकों का छिड़काव कर सकते हैं। फसल में इस कीड़े के अंडे दिखते ही उन्हें नष्ट कर दें और इस कीड़े का प्रकोप अधिक बढ़ जाए तो किसान अपने खेतों में एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी का छिड़काव, 10 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की दर से कर सकते हैं।
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किसानों ने की मुआवजे की मांग
किसानों प्रकाश चंद, सोमदत्त, सरवण कुमार, सुशील कुमार, उत्तम चंद, बर्फी राम, राजकुमार, प्रेम चंद, ज्ञान चंद, जगदीश चंद, जोगिंद्र कुमार, अमर चंद, मदन लाल, कौशल्या देवी, बबीता देवी, मीनाक्षी ने सरकार और कृषि विभाग से गुहार लगाई है कि नुकसान का आकलन करके उचित मुआवजा दिया जाए।