बिलासपुर।
शहर के 11 नंबर वार्ड में मिड हिमालय प्रोजेक्ट के कार्यालय के बाहर रातोंरात छोटे-बड़े खैर के करीब एक दर्जन हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। लेकिन इसके बाद भी संबंधित विभाग इस मामले को लेकर खामोश है। हैरत यह है कि अभी तक इस मामले की किसी ने शिकायत तक करना जरूरी नहीं समझा। इससे साफ होता है कि खैर के पेड़ मिलीभगत से काटे गए हैं। गौरतलब है कि जिले में अभी श्रीनयना देवी और कोठीपुर में हुए अवैध खैर कटान का मामला सुलझा भी नहीं है, कि दूसरी ओर अब मिड हिमालय प्रोजेक्ट कार्यालय के बाहर पेड़ काट दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि मिड हिमालय प्रोजेक्ट कार्यालय के साथ खैर के छोटे-बड़े करीब एक दर्जन पेड़ थे, जो रातोंरात हरे पेड़ काट दिए गए है। पेड़ किसने काटे, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। वहीं, सब से बड़ा सवाल यह है कि कार्यालय के पास के पेड़ काटे गए हैं जहां दिन भर प्रोजेक्ट का स्टाफ मौजूद रहता है। दूसरी ओर रात को चौकीदार की ड्यूटी रहती है, लेकिन इसके बावजूद करीब एक दर्जन पेड़ काट दिए जाते हैं। न किसी अधिकारी और न किसी चौकीदार को इसकी भनक लगती है। पेड़ कट भी गए तो इसकी शिकायत क्यों नहीं की गई? इसके अलावा जो पेड़ कटे हैं, उनकी लकड़ी कहां गई? ये बड़े सवाल हैं। कहीं पेड़ कटान मिलीभगत से तो नहीं हुआ है? पेड़ कटने के बाद मौके पर ठूंठ मौजूद हैं लेकिन मिड हिमालय प्रोजेक्ट के किसी भी अधिकारी ने इस संबंध में न वन विभाग को और न ही पुलिस को कोई शिकायत देना जरूरी समझा, जो मिलीभगत की ओर भी संदेह पैदा कर रहा है। इसके बारे में वन विभाग के डीएफओ सरोज भाई पटेल का कहना है कि इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर इस प्रकार का कोई मामला है तो वन विभाग इस पर कार्रवाई करेगा।