अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
बुधवार को सत्र न्यायाधीश बिलासपुर बहादुर सिंह की अदालत ने 13 साल की नाबालिग के साथ दुराचार के आरोप सिद्ध होने पर 10 साल के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद रमेश चंद पुत्र मुंशीराम गांव अमरपुर तहसील घुमारवीं जिला बिलासपुर को दोषी करार देते सजा सुनाई। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 506 व पोस्को अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाह अपने पक्ष में पेश किए। जिला न्यायवादी संदीप अत्री ने जानकारी देते हुए बताया की 22 अगस्त 2015 को पीड़िता को उसकी माता ने क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर से दवाइयां लाने के लिए भेजा था। यहां पर उसे आरोपी मिला जो एंबुलेंस ड्राइवर के तौर पर कार्यरत था। वह पीड़िता का रिश्ते में मौसा लगता था। आरोपी ने पीड़िता से दवाओं की पर्ची और पैसे लिए जबकि उसे अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के प्रथम तल पर ड्राइवरों के लिए बनाए कमरे में बैठा दिया। यहां पर वह थोड़ी देर बाद दवाइयां लेकर वापस आया और दरवाजा बंद कर पीड़िता के साथ दुराचार किया। उसके उपरांत वह पीड़िता को एक मंदिर में ले गया जहां उसने उसे घटना को किसी दूसरे को न बताने की कसम दिलाई गई। जबकि उसे धमकी दी कि अगर उसने यह बात किसी और को बताई तो वह उसके माता-पिता को मार डालेगा। घर पहुंचकर पीड़िता ने घटना के बारे में अपनी माता को बताया। जब पीड़िता अपनी शिकायत दर्ज करवाने घुमारवीं थाना जा रही थी तो उस समय दोषी थाना के बाहर खड़ा था। इसके चलते डर के कारण पीड़िता ने दोषी का नाम पुलिस को नहीं बताया। पीड़िता की शिकायत पर घुमारवीं थाना पुलिस में कुलदीप चंद नामक व्यक्ति के विरुद्ध यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया था। मगर फॉरेंसिक जांच में नए तथ्य आने पर पुलिस इंस्पेक्टर अशोक चौहान ने पीड़िता से दोबारा पूछताछ की। इसमें उपरोक्त दोषी के संदर्भ में बात सामने आई है, जिस पर पुलिस थाना सदर में प्राथमिकी नंबर 281/ 2015 दर्ज की गई मामले की छानबीन सब इंस्पेक्टर नरेश ने की अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी के डीएनए के सैंपल लिए गए। इसमें आरोपी का पीड़िता से दुराचार करने की पुष्टि हुई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाह अपने पक्ष में पेश किए। अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास, 10000 जुर्माने, भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत छह माह के कठोर कारावास और 5000 जुर्माने जबकि पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10000 जुर्माने की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी।