अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
सदर उपमंडल के जिनणु गांव में सड़क निर्माण में हो रहे अवैध कटान को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने अपने आदेश में वन विभाग को निर्देश दिए हैं कि पेड़ कटान पर रोक लगाएं। इसके साथ ही प्रदेश उच्च न्यायाल ने इस संबंध में 15 दिन में कोर्ट में जवाब पेश करने को भी कहा है।
सड़क निर्माण के लिए हरे पेड़ों के काटने की बात कहते हुए दुर्गी देवी पत्नी तुलसी राम ने माननीय उच्च न्यायालय में सीडब्ल्यूपी नंबर 1349 ऑफ 2017 में अपील दायर की थी। इसमें कहा गया था कि सड़क को बनाने में भारी संख्या में हरे पेड़ों को नियमों को ताक पर रख कर काटा जा रहा है।
इस मामले में सुनवाई करते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंड पीठ ने 21 जून को अपना निर्णय सुनाते हुए प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट को निर्देश दिए कि वह इस प्रार्थना पत्र पर 15 दिन के भीतर अपना फैसला दें। साथ ही इस खंडपीठ ने यह भी कहा कि आशा की जाती है कि इस दौरान प्रतिवादी यानी कि हिमाचल सरकार के प्रतिनिधि के रूप में वन विभाग के सचिव, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट, वन मंडलाधिकारी बिलासपुर, डीसी बिलासपुर, ग्राम पंचायत माकड़ी मारकंड और प्रतिवादी लच्छू राम यह सुनिश्चित करेंगे कि मौके पर किसी भी प्रकार से पेड़ों का अवैध कटान न हो सके।
अभी भी चल रहा है सड़क निर्माण का कार्य
दुर्गी देवी ने न्यायालय के आदेशों की प्रति देते हुए बताया कि न्यायालय के इन आदेशों की यहां कोई अनुपालन नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों के बाद भी जिनणु गांव में जबरन सड़क निकालने का कार्य चल रहा है। जबकि इस बारे में लिखित रूप से डीएसपी को शिकायत भी दी गई है। इसके बाद भी काम को रोका नहीं गया है।
डीएफओ बिलासपुर सरोज भाई पटेल का कहना है कि इस संबंा में शिकायत मिली है जिस पर तुरंत आरओ को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आरओ को नियम अनुसार कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं।