बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान की गई अवैध डंपिंग की रिपोर्ट को अपने स्तर पर निपटाने के मामले में तत्कालीन कानूनगो चेतराम को एसडीएम कार्यालय से नोटिस जारी हुआ है। उक्त अधिकारी ने मत्स्य विभाग की ओर से दी गई संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों के पास नहीं पहुंचने दिया था और पूरे मामले को अपने स्तर पर ही रफा-दफा कर दिया था। पूरे मामले का खुलासा आरटीआई से प्राप्त सूचना से हुआ था। इसके बाद फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने इस संबंध में प्रशासन को शिकायत दी थी। जिस पर कार्रवाई करते एसडीएम बिलासपुर प्रियंका वर्मा ने अपने कार्यालय से पत्र संख्या बीएलएस-एसडीएम-एसडीके/2018 3127 के तहत उक्त अधिकारी से पूरे मामले का स्पष्टीकरण मांगा है।
हालांकि उक्त अधिकारी नायब तहसीलदार के पद से सेवानिवृत्त हो चुका है। लेकिन, एसडीएम ने पत्र के माध्यम से सात दिन के अंदर जवाब मांगा है और पूछा है कि किस आधार पर उन्होंने रिपोर्ट को अपने स्तर पर रफादफा कर दिया।
उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान मलबा नदी, नालों और गोबिंदसागर में डाला जा रहा है। इससे मछली उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो मछली उत्पादन आधा रह गया है। लोगों की शिकायत पर मत्स्य विभाग के निदेशक एवं सचिव ने एक कमेटी का गठन कर मौके पर निरीक्षण किया था। इसकी रिपोर्ट बनाकर पत्र संख्या फिश-(एफ)5-86/2014(डी) दिनांक 17.08.2015 को उक्त अधिकारी के माध्यम से प्रशासन को भेजी थी। लेकिन, उक्त अधिकारी ने इस पूरी रिपोर्ट को प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष रखना जरूरी नहीं समझा और पूरे मामले को अपने स्तर पर ही रफादफा कर दिया। इसका खुलासा होने पर तत्कालीन कानूनगो को नोटिस जारी कर सात दिन के अंदर जवाब मांगा गया है।
उधर, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित संघ के महासचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि इस पूरे मामले से प्रशासन की मिलीभगत सामने आई है। किस तरह से एक राजस्व विभाग के अधिकारी ने पूरी रिपोर्ट को अपने स्तर पर ही रफादफा कर दिया। समय-समय पर इस मामले को उठाते रहे, लेकिन यहां सुनने वाला कोई नहीं है। कहा कि अगर उस समय अधिकारी नींद से जाग गए होते तो आज मछली उत्पादन में इतनी गिरावट न आती।