बलासपुर पुलिस लाइन में डीएनए की कार्यशाला की अध्यक्षता करते एएसपी भागमल और एफएसएल निदेशक अरूण श?
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बिलासपुर। अपराधों का खुलासा वैज्ञानिक तौर-तरीकों से करने के लिए प्रदेश पुलिस को प्रशिक्षित किया जा रहा है। बलात्कार से लेकर हत्या तक के मामलों में अपराधियों तक पहुंचने की सुरागरसी के गुर सिखाए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में रविवार को पुलिस लाइन बिलासपुर में विज्ञान प्रयोगशाला का आयोजन हुआ। एफएसएल के निदेशक अरुण शर्मा ने पुलिस कर्मियों को डीएनए से संबंधित जानकारी दी।
लगभग पूरे दिन चली इस कार्यशाला में विज्ञान प्रयोगशाला निदेशक अरुण शर्मा ने पुलिस थाना प्रभारियों और आइओ को डीएनए सैंपलिंग और अज्ञात शवों के डीएनए टेस्ट कराने के तौर-तरीके बताए। इसके अलावा विष, ड्रग, नारकोटिक्स, आग्नेयास्त्र, जाली मुद्रा और विस्फोटक पदार्थों की छानबीन के बारे में बारीकी से जानकारियां दीं। कार्यशाला में हैंड राइटिंग (हस्त लेख) मिलान के तरीके भी बताए।
इस कार्यशाला में बिलासपुर पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागमल ठाकुर सहित सभी थानों के एसएचओ मौजूद रहे। अरुण शर्मा ने जिला पुलिस को डीएनए सैंपलिंग की जानकारी दी। उन्होंने जिला टीम को अपराध को साबित करने में डीएनए के महत्व को समझाया। इस मौके पर अरुण ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्य शत प्रतिशत रूप में न्यायालय में अपराध को साबित करने में मान्य होते हैं।
कहा कि डीएनए के आधार पर बहुत से केस सुलझाए गए हैं। डीएनए प्रक्रिया की जानकारी हर जांचपड़ताल अधिकारी को होना जरूरी है। उन्होंने आईओ को बताया कि अपराध स्थान से डीएनए सैंपल के लिए कौन-कौन से साक्ष्य इकट्ठा करने होते हैं और उन्हें कैसे लैबोरेटरी तक पहुंचाया जाता है ताकि अपराध से जुड़े अपराधियों तक पहुंचा जा सके और किसी भी कठिन केस को जल्द से हल किया जा सके।
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