बिलासपुर। एनडीपीएस के मामलों में कोई कार्रवाई न करना कोट थाना प्रभारी को महंगा पड़ गया। थाना प्रभारी के खिलाफ शिकायतें मिली थीं कि कोट थाना अति संवेदनशील है लेकिन थाना प्रभारी अपने एक साल आठ महीने के कार्यकाल में एक भी केस एनडीपीएस का दर्ज नहीं कर पाया। इसके बाद इस पूरे मामले की जांच डीएसपी श्री नयना देवी द्वारा की गई जिसके आधार पर मंगलवार को एसपी बिलासपुर दिवाकर शर्मा ने थाना प्रभारी के निलंबन के आदेश जारी किए वहीं पूरी विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए।
उल्लेखनीय है कि एसपी बिलासपुर दिवाकर शर्मा ने कोट कहलूर थाना का औचक निरीक्षण किया। जहां रिकॉर्ड में पाया गया कि थाना प्रभारी के कार्यकाल के दौरान 15 मामले एनडीपीएस के दर्ज हुए हैं लेकिन सभी मामले एसआईयू की टीम द्वारा पकड़े गए थे। वहीं डीएसपी श्री नयना देवी जी ने भी बताया कि थाना प्रभारी कोट ने जब से थाने में कार्यभार ग्रहण किया है तबसे अपने स्तर पर कोई भी मामला एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज नहीं किया है।
वहीं थाना प्रभारी के खिलाफ डीजी और सीएम को भी शिकायत की गई थी जिसमें थाना प्रभारी पर पैसों की उगाई जैसे संगीन आरोप थे। वहीं थाना के ड्राइवर के पास भी थाना प्रभारी की कई बातें फोन पर रिकॉर्ड हैं। जबकि थाना प्रभारी पर यह भी आरोप है कि वह नशा माफिया से मिला हुआ है। जबकि सूत्रों के अनुसार थाना प्रभारी की चंडीगढ़ में भी संपत्ति है और वह राजनीतिक रसूख रखने वालों में एक माना जाता था।
एसपी बिलासपुर दिवाकर शर्मा ने बताया कि श्री नयना देवी क्षेत्र पंजाब सीमा से लगा हुआ है। जबकि इस क्षेत्र में नशे का कारोबार भी काफी है लेकिन इसके बाद भी थाना प्रभारी ने अपने एक साल आठ महीने के कार्यालय में कोई भी मामला नशा कारोबारियों के खिलाफ नहीं दिया है। इसके अलावा अन्य शिकायतें भी थीं जिसकी जांच के बाद थाना प्रभारी को निलंबित किया गया है। जबकि मामले की जांच एएसपी बिलासपुर भागमल ठाकुर को सौंपी गई है।