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Bilaspur News: कोसरियां में महिला की हत्या के मामले में आरोपी को नहीं मिली जमानत

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सेप्टिक टैंक में मिला था शव, वारदात के बाद तीनों आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने सुनाया आदेश

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के साथ लगते दनोह कोसरियां में प्रवासी महिला की हत्या के मामले में आरोपी पति गुड्डू चौहान को अदालत से राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला पुलिस थाना सदर बिलासपुर में दर्ज है। पुलिस के अनुसार महिला अपने पति गुड्डू चौहान और उसके भाइयों के साथ दनोह कोसरियां में किराये के कमरों में रहती थी। 9 फरवरी को सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया तो महिला का शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। टैंक का ढक्कन सीमेंट से बंद किया गया था। पोस्टमार्टम में सिर में कुंद वस्तु या सतह से टकराने से लगी चोट को मौत का कारण बताया गया। जांच में कमरे से मिले खून को डीएनए रिपोर्ट में मृतका से जोड़ा गया। सह आरोपी बंशी चौहान की पैंट पर मिले मिश्रित डीएनए प्रोफाइल के एक घटक का मिलान भी मृतका से होने की बात रिपोर्ट में कही गई। पुलिस ने कॉल लोकेशन और बिलासपुर बस अड्डे की सीसीटीवी फुटेज को भी जांच का आधार बनाया। पुलिस के अनुसार 17 जनवरी को कथित वारदात के बाद गुड्डू, गोविंद और बंशी सामान लेकर बिलासपुर से एक साथ निकले थे। बाद में गुड्डू और बंशी को गिरफ्तार किया गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी निर्दोष है, मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और उससे कोई हथियार बरामद नहीं हुआ। जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के साथ करीब छह महीने की हिरासत को भी जमानत का आधार बताया गया। वहीं अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी दूसरे राज्य का निवासी है और रिहाई के बाद फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। अदालत ने कहा कि जमानत के स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रथमदृष्टया उपलब्ध परिस्थितियों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। अभियोजन सामग्री आरोपी को उस परिसर से जोड़ती है जहां महिला की कथित हत्या हुई और शव सेप्टिक टैंक में छिपाया गया। घटना के बाद सह आरोपियों के साथ बिलासपुर छोड़ने का तथ्य भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी का हिस्सा है। अदालत ने कहा कि मुकदमा अभी साक्ष्य दर्ज करने के चरण में है और महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही होनी बाकी है। ऐसे में जमानत से अभियोजन साक्ष्य की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अपराध की गंभीरता, उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य, आरोपी के घटना बाद के आचरण और फरार होने की आशंका को देखते हुए अदालत ने गुड्डू चौहान की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत आवेदन पर की गई टिप्पणियों का मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं होगा।
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