पुलिस जांच के दौरान आरोपी ने कबूला है चिट्टे का आदी हूं, अपनी लत पूरी करने के लिए करता हूं चोरी
आरोपी का 15 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड, अदालत ने समाज के लिए बताया खतरा
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। चोरी और संगठित अपराध के गंभीर मामलों में घिरे आरोपी सुखा को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नविष भारद्वाज बिलासपुर की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास, लगातार अपराध करने की प्रवृत्ति और समाज के लिए संभावित खतरे को देखते हुए उसे इस स्तर पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 जून 2025 को शिकायतकर्ता ने स्वारघाट पुलिस को लिखित शिकायत दी थी कि उनके घर के पूजा कक्ष का ताला तोड़कर सोने-चांदी के गहने, नकदी और नोटों की मालाएं चोरी कर ली गई हैं। रात करीब 11:30 बजे परिवार सोया था और सुबह करीब 5 बजे उठने पर अलमारी के लॉकर खुले मिले और सामान बिखरा पड़ा था। चोरों ने खिड़की की लोहे की ग्रिल उखाड़कर वारदात को अंजाम दिया था। खेतों में बारिश के कारण पैरों के निशान भी मिले। चोरी किए गए सूटकेस और संदूक बाद में खेतों में खाली बरामद हुए। जांच के दौरान आरोपी सुखा को एक अन्य मामले में पुलिस रिमांड पर लिया गया था। इसी दौरान पूछताछ में उसने चोरी की वारदातों को कबूल किया। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह चिट्टे (नशीले पदार्थ) का आदी है और अपनी लत पूरी करने के लिए चोरी करता है। उसने यह भी बताया कि वह सीसीटीवी से बचने के लिए बाइक छिपाकर खेतों के रास्ते घरों तक पहुंचता था और संगठित गिरोह के साथ कई जिलों में चोरी की वारदात को अंजाम देता रहा है। स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आरोपी के खिलाफ 2021 से 2025 के बीच 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हिमाचल प्रदेश और हरियाणा दोनों राज्य शामिल हैं। इनमें से एक मामला लूट और चोट पहुंचाना का भी है, जिससे अदालत ने माना कि आरोपी हिंसा करने से भी नहीं हिचकता। 14 मामले अभी ट्रायल में लंबित हैं, जो आरोपी को आदतन अपराधी साबित करते हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के पास 11 लाख रुपये से अधिक कीमत की होंडा अमेज कार है, जबकि वह खुद को मजदूर/कबाड़ी बताता है और उसका कोई टैक्स रिकॉर्ड नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि संगठित अपराध से जुड़ी संपत्ति का संतोषजनक हिसाब न दे पाना गंभीर अपराध है और इसका बोझ आरोपी पर ही है, जिसे वह स्पष्ट नहीं कर सका। आरोपी की स्वतंत्रता समाज की सुरक्षा पर भारी नहीं हो सकती। आरोपी लगातार अपराध कर रहा है और पहले जमानत मिलने के बाद और अधिक बेखौफ होकर अपराधों को अंजाम दे रहा है। ऐसे में यह आशंका प्रबल है कि जमानत मिलने पर वह फिर से अपराध करेगा और गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी सुखा की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और मुख्य मामले की सुनवाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। संवाद