-2007 में रखी गई थी आधारशिला, बजट नहीं मिलने से रुका काम
- पर्यटकों को मिलनी थी कई प्रकार की सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट (बिलासपुर)। प्रदेश के प्रवेश द्वार स्वारघाट में प्रस्तावित पर्यटन सूचना केंद्र का निर्माण कार्य पिछले डेढ़ दशक से अधर में लटका हुआ है। इस कारण बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को प्रदेश के पर्यटक स्थलों की जरूरी सूचना उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
12 सितंबर 2007 को तत्कालीन वन युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री रामलाल ठाकुर ने इको पर्यटन विकास योजना के अंतर्गत इको जागरूकता एवं पर्यटन सूचना केंद्र स्वारघाट की आधारशिला रखी थी। इसका निर्माण कार्य पूरा करने के उद्देश्य से बाकायदा 50 लाख रुपये के बजट का प्रावधान भी पर्यटन विभाग की ओर से किया गया था। भूमि वन विभाग की होने के कारण पर्यटन सूचना केंद्र का निर्माण कार्य पर्यटन विभाग ने वन विभाग को 32 लाख रुपये की पहली किश्त देते हुए सौंपा था। हालांकि वन विभाग ने पर्यटन सूचना केंद्र स्वारघाट के भवन का निर्माण कार्य शुरू करते हुए करीब 10 लाख की राशि भी खर्च कर दी थी और उस स्थान पर एक डंगा लगा कर पिलर पर छत डाल दी। हालांकि कछुआ गति से ही सही, लेकिन दो साल पहले यहां पर दो मंजिला भवन का निर्माण भी किया जा चुका है। इस दो मंजिला भवन निर्माण के बावजूद यहां पर चाहरदीवारी नहीं लगाई जा रही है। इस कारण इस स्थान पर जंगली जानवर, लावारिस पशु यहां पर घूमते नजर आते हैं। निर्माण कार्य अधर में लटकने की वजह से पर्यटन व्यवसाय पर भी कुछ हद तक इसका असर देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार, पर्यटन विभाग और वन महकमे को स्वारघाट में डेढ़ दशक पहले से प्रस्तावित पर्यटन सूचना केंद्र के अधर में लटके कार्य को जल्द पूरा करने के लिए खास तौर से प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि पर्यटन व्यवसाय को और ज्यादा पंख लग सकें। वन विभाग के मुख्य अरण्यपाल अनिल शर्मा ने बताया कि शेष बचे निर्माण कार्य के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की गई है। बजट जारी होने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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पर्यटकों को मिलनी है यह सुविधाएं
प्रदेश के प्रवेश द्वार स्वारघाट में पर्यटन सूचना केंद्र का निर्माण होने के बाद कुल्लू, मनाली, शिमला और अन्य स्थानों के लिए घूमने आने वाले पर्यटकों को यहां स्वारघाट पहुंचने पर पर्यटन से संबंधित विभिन्न जानकारियां मिलनी थी। यहां पर पर्यटकों के लिए शौचालय सुविधा के साथ अन्य सुविधाएं मिलना भी निश्चित था। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलना भी तय था।