बोले, सीएम के दौरे से जनता को थी बड़ी उम्मीदें, विकास के लिए नहीं दिया कोई पैसा
-कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों, फैसलों से जनता में नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बिलासपुर दौरे को निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि सही मायनों में मुख्यमंत्री का बिलासपुर सदर का यह पहला दौरा था। दो वर्ष में इस सरकार ने बिलासपुर के विकास के लिए एक पैसा तक नहीं दिया है। ऐसे में लोगों ने मुख्यमंत्री से कुछ नई सौगातों की उम्मीद लगा रखी थी, लेकिन वह केवल भाजपा सरकार के समय के कार्यों का उद्घाटन करने तक सीमित रहे।
उन्होंने कहा कि इन कार्यों का भी 95 फीसदी काम भाजपा कार्यकाल में पूरा हो चुका था। कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों व फैसलों से जनता में अत्यधिक नाराजगी है। लोगों के आक्रोश से बचने के लिए मुख्यमंत्री जनसभा करने के बजाए बिलासपुर के लोगों को झुनझुना थमाकर सैर-सपाटा करके चले गए। कहा कि मुख्यमंत्री का बहुप्रतीक्षित बिलासपुर दौरा निराश करने वाला रहा। लगभग दो वर्ष में सही मायनों में बिलासपुर सदर का यह उनका पहला ही दौरा था। इस अवधि में बिलासपुर के विकास के लिए इस सरकार ने एक पैसा तक नहीं दिया है। लोगों को उम्मीद थी कि दिवाली पर्व से ठीक पहले बिलासपुर आ रहे मुख्यमंत्री जिले को कुछ नए तोहफे देंगे, लेकिन उनकी सारी उम्मीदें धराशायी होकर रह गईं। उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी और विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्यालय भवन का उद्घाटन किया। इन दोनों प्रोजेक्टों का लगभग 95 फीसदी काम भाजपा सरकार के समय पूरा हो चुका था। पहले से बजट का प्रावधान होने के बावजूद बाकी बचा पांच फीसदी काम पूरा करने में इस सरकार ने दो साल लगा दिए। मौजूदा सरकार ने इन पर केवल अपने नाम की पट्टिकाएं लगाने का ही काम किया है।
कहा कि पिछले दो वर्ष में कांग्रेस सरकार ने कई जनविरोधी फैसले लिए हैं। सत्ता में आते ही हजारों संस्थान बंद कर दिए। हिम केयर योजना बंद कर दी गई। 5 लाख नौकरियां देने की गारंटी के साथ सत्ता में आई कांग्रेस ने 2 साल में ही 2 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां खत्म कर दीं। प्रतिमाह 1500 रुपये देने के नाम पर नारी शक्ति को धोखा दिया गया। बसों में मामूली सा सामान ले जाने पर भी किराया तय कर दिया गया। पेंशनरों को एरियर से वंचित रखा गया। 100 रुपये की दर से दूध और 2 रुपये की दर से गोबर खरीदने समेत कोई भी गारंटी पूरी नहीं हो पाई है। यहां तक कि टॉयलेट पर टैक्स लगाने का अजीबोगरीब फैसला तक ले लिया गया। भारी विरोध की वजह से कुछ फैसले भले ही वापस ले लिए गए हों, लेकिन सरकार की जनविरोधी नीतियों व फैसलों से जनता के हर वर्ग में अत्यधिक नाराजगी है। लोगों के आक्रोश से बचने के लिए मुख्यमंत्री ने जनसभा का कार्यक्रम ही रद कर दिया और गोबिंद सागर में सैर-सपाटा करके वह वापस चले गए।