पूर्व भाजपा सरकार पर 70 हजार करोड़ की अनटाइड ग्रांट के दुरुपयोग का आरोप
मंत्री में सभी सांसदों से की प्रदेश हित में एकजुट होने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सोलहवें वित्त आयोग के तहत 1 अप्रैल 2026 से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से प्रदेश के बजट के लगभग 12.71 प्रतिशत हिस्से पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है और विकास कार्य भी प्रभावित होंगे।
धर्माणी ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में भारत सरकार द्वारा जारी लगभग 70 हजार करोड़ रुपये की अनटाइड ग्रांट का समुचित उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस राशि को कहां और किस प्रकार खर्च किया गया, इसका स्पष्ट हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। उनका कहना था कि यदि इस अनुदान का सही दिशा में उपयोग किया जाता तो प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती और हिमाचल आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकता था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए वित्तीय कुप्रबंधन को भी केंद्र की ओर से आरडीजी बंद करने के निर्णय का एक कारण माना जा सकता है। धर्माणी ने आरोप लगाया कि बीते दिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र द्वारा आयोजित सर्वदलीय बैठक में भाजपा विधायकों ने प्रदेश हित से अधिक पार्टी हित को प्राथमिकता दी और बैठक से बीच में ही चले गए। मंत्री ने कहा कि आरडीजी बंद करने के निर्णय के दौरान प्रदेश के सातों सांसदों सहित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सार्वजनिक तौर पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य नड्डा की अगुवाई में भाजपा नेताओं के साथ मिलकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री से मिलकर प्रदेश हित में राजस्व घाटा अनुदान जारी रखने की मांग करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता केवल प्रदेश के सांसदों और केंद्रीय मंत्री को आगे आकर प्रदेश हित में एकजुट प्रयास करने की है।