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Bilaspur News: जमीन विवाद में महिला की सिविल अपील खारिज, ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार

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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश घुमारवीं ने कहा, रिकॉर्ड में दर्ज खरीदार ही फिलहाल मालिक
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धोखाधड़ी का निर्णय मुख्य मुकदमे में साक्ष्यों के बाद ही होगा संभव

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जमीन की बिक्री को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक महिला की सिविल अपील खारिज कर दी है। अदालत ने झंडूता की सिविल अदालत द्वारा अंतरिम निषेधाज्ञा (स्टे) देने से इनकार किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि फिलहाल रिकॉर्ड के अनुसार भूमि के वर्तमान खरीदार ही मालिक हैं। यह तय करना कि बिक्री विलेख धोखाधड़ी से कराया गया था या नहीं, मुख्य मुकदमे की सुनवाई और साक्ष्यों के बाद ही संभव होगा।
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महिला ने अदालत में दायर वाद में कहा था कि वह झंडूता क्षेत्र के गांव झबोला स्थित अपनी पैतृक भूमि में 17 बिस्वा हिस्से की सह-स्वामिनी थी। आर्थिक जरूरत के चलते उसने केवल दो बिस्वा भूमि बेचने की सहमति दी थी। उसका आरोप था कि खरीदार ने उसकी अशिक्षा और सरल स्वभाव का फायदा उठाकर विभिन्न दस्तावेजों पर अंगूठा लगवा लिया और बाद में पूरे 17 बिस्वा हिस्से की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। महिला का कहना था कि उसे कथित धोखाधड़ी की जानकारी बाद में तब मिली, जब खरीदार ने भूमि पर अपना अधिकार जताना शुरू किया। इसके बाद उसने अदालत में बिक्री विलेख, उसके आधार पर दर्ज म्यूटेशन, बाद में हुए भूमि हस्तांतरण को निरस्त घोषित करने की मांग करते हुए दीवानी वाद दायर किया। साथ ही उसने यह भी आग्रह किया कि अंतिम फैसला आने तक प्रतिवादियों को जमीन पर निर्माण, खुदाई, पेड़ काटने, कब्जा बदलने अथवा किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने से रोका जाए। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भूमि की रजिस्ट्री वर्ष 2020 में हुई थी। इसके बाद पहले खरीदार ने वही भूमि दो अन्य व्यक्तियों के नाम बेच दी और राजस्व अभिलेखों में उनके नाम पर म्यूटेशन भी दर्ज हो गई। महिला ने इन दोनों बिक्री विलेखों को भी चुनौती देते हुए उन्हें अवैध और शून्य घोषित करने की मांग की। महिला की अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी को सिविल जज, झंडूता ने जनवरी 2023 में खारिज कर दिया था। अदालत ने माना था कि रिकॉर्ड में वर्तमान खरीदार भूमि के स्वामी दर्ज हैं और इस स्तर पर उन्हें उनके अधिकारों के प्रयोग से नहीं रोका जा सकता। इसी आदेश को चुनौती देते हुए महिला ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की थी। अपील पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने कहा कि अस्थायी निषेधाज्ञा देने के लिए आवेदक को प्रथम दृष्टया मजबूत मामला, सुविधा का संतुलन अपने पक्ष में और अपूरणीय क्षति की संभावना साबित करनी होती है। अदालत ने कहा कि वर्तमान रिकॉर्ड में विधिवत पंजीकृत बिक्री विलेख और उसके आधार पर दर्ज राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि बिक्री धोखाधड़ी से हुई थी। यह विवाद मुख्य मुकदमे में साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद ही तय किया जाएगा। सभी तथ्यों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद महिला की सिविल अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
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