दो जिलों की सीमा पर स्थित स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी से मरीज परेशान
पांच पंचायतों के लोगों को निजी क्लीनिकों का लेना पड़ता है सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट (बिलासपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्वारघाट में पिछले चार वर्षों से नियमित चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिलासपुर और सोलन जिले की सीमा पर स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टरों की कमी के चलते दूसरे अस्पतालों और निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो बढ़ाया गया, लेकिन यहां नियमित चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं हो पाई।
स्वारघाट में स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत डिस्पेंसरी के रूप में हुई थी। इसके बाद इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ट्रामा सेंटर और फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया। इसके बावजूद यहां नियमित चिकित्सकों की तैनाती की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां नियुक्त होने वाले चिकित्सक भी दो-तीन महीने से अधिक समय तक नहीं टिकते। तबादलों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।
लोगों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दर्जे के अनुरूप यहां तीन चिकित्सकों सहित अन्य आवश्यक स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए। कोरोना काल में मरीजों की सुविधा के लिए यहां ऑक्सीजन प्लांट भी स्थापित किया गया था, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
दो जिलों की सीमा पर स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्र के अलावा नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पहाड़ी क्षेत्र की करीब पांच पंचायतों के लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। नियमित डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं।
नेताओं और प्रशासन के समक्ष उठाई मांग, नहीं हुआ समाधान
वरिष्ठ नागरिक एवं पंचायत समिति के पूर्व अध्यक्ष राममूर्ति धर्माणी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वारघाट रामभरोसे चल रहा है। यहां वर्षों से नियमित चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय नेताओं और जिला प्रशासन के समक्ष सैकड़ों बार नियमित चिकित्सकों की तैनाती की मांग उठाई गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
श्री नयना देवी, बिलासपुर के लगाने पड़ रहे चक्कर
स्थानीय निवासी अनिल धर्माणी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी का खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। किसी व्यक्ति को मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाना हो तो उसे श्री नयना देवी, बिलासपुर या नालागढ़ जाना पड़ता है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।
बेहतर उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए
ग्राम पंचायत कुटैहला के उपप्रधान गुरदेव शर्मा ने बताया कि पदभार संभालने के बाद से ही क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से सीएचसी में नियमित चिकित्सकों की तैनाती का आग्रह किया है। क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए।
चिकित्सक की नियुक्ति न होने से लोग परेशान
कुलाह निवासी हुकम सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में बड़ी संख्या में चिकित्सकों की तैनाती की है, लेकिन स्वारघाट के लिए किसी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होना समझ से परे है। पिछले चार वर्षों से नियमित डॉक्टर नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार चाहे तो यहां जल्द चिकित्सकों की तैनाती कर सकती है।
राममूर्ति धर्माणी- फोटो : 1
राममूर्ति धर्माणी- फोटो : 1
राममूर्ति धर्माणी- फोटो : 1
राममूर्ति धर्माणी- फोटो : 1