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Bilaspur News: वार्ड नंबर बदलने से लोगों की बढ़ी चिंता, नगर परिषद ने चुनाव आयोग से लगाई गुहार

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पुराने वार्डों के नंबर पूर्ववत रखने का प्रस्ताव, हजारों लोगों के दस्तावेजों में संशोधन से बचाने की पहल
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नए वार्डों को 8 और 9 नंबर देने का प्रस्ताव
परिसीमन के बाद नगर परिषद में सात से बढ़कर हुए हैं नौ वार्ड


संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं में वार्डों के परिसीमन के बाद बदले वार्ड नंबर अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। वर्षों से एक ही वार्ड नंबर के आधार पर बने सरकारी दस्तावेजों में संशोधन की आशंका से लोग चिंतित हैं। इसे देखते हुए नगर परिषद ने चुनाव आयोग से वार्ड नंबरों में संशोधन का आग्रह करने का निर्णय लिया है।
नगर परिषद का प्रस्ताव है कि पहले से मौजूद सातों वार्डों के नंबर पूर्ववत एक से सात तक ही रखे जाएं, जबकि परिसीमन के दौरान बनाए दो नए वार्ड हारकुकार और जगदंबा को क्रमशः वार्ड नंबर-8 और वार्ड नंबर-9 आवंटित किए जाएं। परिषद का मानना है कि ऐसा होने पर हजारों लोगों को अपने सरकारी दस्तावेजों में संशोधन नहीं कराना पड़ेगा।
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नगर परिषद क्षेत्र में पहले सात वार्ड थे। परिसीमन के बाद क्षेत्र का विस्तार होने पर दो नए वार्ड बनाए गए, लेकिन उन्हें अंत में जोड़ने के बजाय बीच में क्रमांक दे दिए गए। इसके चलते पहले से मौजूद कई वार्डों के नंबर बदल गए। बजोहा वार्ड, जो पहले वार्ड नंबर-5 था, अब वार्ड नंबर-7 हो गया है, जबकि टिकरी वार्ड का नंबर 6 से बदलकर 8 कर दिया गया है। वहीं, नवगठित हारकुकार वार्ड को वार्ड नंबर-5 और जगदंबा वार्ड को वार्ड नंबर-6 आवंटित किया गया है।
वार्ड नंबर बदलने से लोगों के आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर और अन्य सरकारी अभिलेखों में दर्ज जानकारी प्रभावित होने की आशंका है। लोगों का कहना है कि भविष्य में सरकारी कार्यों या दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान वार्ड नंबरों में अंतर के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। यदि दस्तावेजों में संशोधन कराना पड़ा तो लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होगी।
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इस मुद्दे पर नगर परिषद की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। परिषद ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि चुनाव आयोग को पत्र भेजकर वार्ड नंबरों में संशोधन का आग्रह किया जाएगा। परिषद का कहना है कि यह केवल वार्ड नंबर बदलने का मामला नहीं, बल्कि हजारों नागरिकों की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। यदि चुनाव आयोग इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है तो लोगों को अपने दस्तावेजों में संशोधन नहीं कराना पड़ेगा और भविष्य में वार्डों की पहचान को लेकर भी किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा।
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