टकरेड़ा के पास 50 करोड़ से 2.26 एकड़ भूमि पर बनेगा भवन
12 साल तक फाइलों में ही उलझा रहा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के भवन निर्माण के लिए जमीन की स्वीकृति मिल गई है। करीब 12 वर्ष से सरकारी फाइलों में उलझा जमीन का मामला अब स्वीकृति मिलते ही सुलझ गया है। अब जल्द ही केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के पास अब अपना भवन होगा।
घुमारवीं में स्थित केंद्रीय विद्यालय को लगभग 12 साल पहले 2012 में वर्तमान तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के प्रयासों से शुरू तो कर दिया गया था, लेकिन जमीन संबंधी अड़चनों के कारण पिछले 12 साल से यह स्कूल सराय के कमरों में ही संचालित हो रहा था। विद्यालय के भवन निर्माण के लिए अभी तक भूमि ही उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। भवन निर्माण के लिए बजट उपलब्ध था, लेकिन जमीन न मिलने के कारण मामला फंसा हुआ था। करीब 12 साल का लंबा अंतराल बीत जाने के बाद भी भवन न बनने से 12वीं की पढ़ाई शुरू हुई नहीं हो पाई थी। यहां तक विद्यार्थियों को कंप्यूटर व स्मार्ट क्लास की सुविधा भी नहीं मिल पा रही थी। जब केंद्रीय विद्यालय खुला तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और निजी विद्यालयों की मनमानी कम होगी। भवन न बनने के कारण अभिभावकों का सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। जमीन के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन हर बार मामला फाइलों में ही लटका था। अब इस विद्यालय के भवन निर्माण का सपना साकार होने जा रहा है। घुमारवीं के टकरेड़ा रोड पर बने कोर्ट परिसर के पास 2.26 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च कर एक आधुनिक भवन का निर्माण किया जाएगा। इसमें हर कक्षा के लिए दो क्लास रूम सहित, इंडोर स्टेडियम, स्कूल कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा और बेहतरीन खेल मैदान उपलब्ध होंगे। भवन न होने के कारण इस समय स्कूल में केवल 325 से छात्र ही अध्ययनरत हैं। भवन निर्माण पूरा होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि विधानसभा क्षेत्र घुमारवीं शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।
कोट
घुमारवीं में स्थित केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन की मंजूरी मिल गई है। अब शीघ्र ही विद्यालय के भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा और बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। केंद्रीय विद्यालय की जमीन का मामला काफी समय से लटका हुआ था। राज्य सरकार की तरफ से प्रयास जारी रखे और अब यह प्रयास रंग लाए हैं।
-राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री