हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की कक्षाएं जारी रखने की मांग
सत्र के बीच बोर्ड परिवर्तन से पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा
नए पाठ्यक्रम व परीक्षा प्रणाली के अनुकूलन में कठिनाई
हिमाचल बोर्ड में पढ़ाई जारी रखने वालों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घुमारवीं को सीबीएसई बोर्ड के अधीन किए जाने संबंधी जारी अधिसूचना के बाद अभिभावकों में असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है। विद्यालय को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पैटर्न में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की सूचना के बाद वर्तमान में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत पढ़ रही छात्राओं के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी संदर्भ में अभिभावकों ने प्रधानाचार्य को लिखित ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंता व्यक्त की है। अभिभावकों में ज्योति देवी, रचना कुमारी, मर्जीना, सपना, रक्षा देवी, पूनम देवी, निशा देवी, अंजू शर्मा, सपना शर्मा, शिवानी, अनीता, कांता देवी, संजय ठाकुर, विनोद कुमार, पूनम शर्मा सहित अन्यों ने कहा कि उनकी बेटियां फिलहाल हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कर रही हैं और वे आगे भी इसी बोर्ड के तहत शिक्षा जारी रखना चाहती हैं। ऐसे में अचानक बोर्ड परिवर्तन से छात्राओं को नए पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप ढलने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। अभिभावकों ने यह भी सवाल उठाया है कि जो छात्राएं हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में ही पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, उनके लिए सरकार की ओर से क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आने से अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि शैक्षणिक सत्र के बीच इस प्रकार का बड़ा बदलाव छात्राओं की पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है और परीक्षा परिणामों पर भी असर पड़ सकता है। ज्ञापन में अभिभावकों ने मांग की है कि जब तक सभी पहलुओं पर स्पष्टता नहीं आती और छात्राओं के हित पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते, तब तक विद्यालय में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की कक्षाएं पूर्ववत जारी रखी जाएं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि किसी भी निर्णय से पहले अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित किया जाए और उनकी राय को भी महत्व दिया जाए। अभिभावकों ने उम्मीद जताई है कि छात्राओं के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन पारदर्शी और संतुलित निर्णय लेगा, ताकि किसी भी विद्यार्थी का नुकसान न हो।